अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने का संकेत दे रहे हैं। ऐसे में अब डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कह दिया है कि केवल ग्रीनलैंड ही अपने भविष्य का फैसला लेने का हक रखता है।
'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं'
डेनमार्क के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों नेताओं ने बुधवार को फोन पर बातचीत की। इस दौरान फ्रेडरिक्सन ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। इसमें यह भी बताया गया कि इस बातचीत से यह साफ हो गया कि ग्रीनलैंड में अमेरिका की बड़ी रुचि है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। हालांकि, दोनों नेताओं ने आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बात
45 मिनट की बातचीत के दौरान डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने आर्कटिक में सुरक्षा को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही ट्रंप को अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत व्यापार संबंधों की याद दिलाई। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी बात की।
अमेरिका पूर्व में भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुका है
डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं और उन्होंने पहली बार साल 2019 में यह सुझाव दिया था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड को खरीदना चाहिए। शीत युद्ध के समय से ही ग्रीनलैंड का अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व रहा है। साल 1946 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने 10 करोड़ डॉलर के सोने में डेनमार्क के नियंत्रण वाले द्वीप ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश की थी।
हालांकि उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया था। एक संप्रभु देश द्वारा दूसरे देश के क्षेत्र खरीदने की बात थोड़ी असामान्य लग सकती है, लेकिन अतीत में इसके कई उदाहरण भी हैं। अमेरिका ने अतीत में लुइसियाना , अलास्का और यूएस वर्जिन आइलैंड्स सहित कई क्षेत्रों को खरीदा है।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की जताई थी इच्छा
ग्रीनलैंड पर 1700 से ही डेनमार्क का नियंत्रण है और यह डेनमार्क से मिलने वाली सब्सिडी पर निर्भर है। ग्रीनलैंड की आबादी 57 हजार है। बीते दिनों ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दुनिया में कहीं भी जाने की आजादी के लिए अमेरिका का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। दरअसल, उत्तरी अमेरिका से यूरोप जाने के सबसे छोटे रूट पर ग्रीनलैंड स्थित है। अमेरिका काफी लंबे समय से ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है। ट्रंप का मानना है कि रूसी और चीनी जहाजों की निगरानी के लिए भी ग्रीनलैंड अहम है।