ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे पहले भारत में पाए गए कोविड-19 डेल्टा वेरिएंट या चिंताजनक वेरिएंट (वीओसी) बी1.617.2, ब्रिटेन में पाए गए अल्फा स्वरूप से लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है और टीकों की प्रभावशीलता को भी कुछ हद तक कम कर देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप निदेशक ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 का उच्च संचरण वाला प्रकार क्षेत्र में जड़ जमा सकता है क्योंकि कई देश प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी कर रहे हैं और अधिक सामाजिक कार्यक्रमों तथा सीमा पार यात्राओं की अनुमति दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के डॉ. हंस क्लूगे ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि इस प्रकार को ‘डेल्टा’ प्रकार के नाम से भी जाना जाता है और इस पर कुछ टीकों के प्रभावी नहीं होने के भी लक्षण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आबादी का कुछ हिस्सा खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अब भी टीका नहीं लगा है।
डब्ल्यूएचओ यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि पिछली गर्मियों के दौरान कम उम्र के लोगों में मामले धीरे-धीरे बढ़ते गए और फिर बुजुर्ग लोगों में संक्रमण फैला, जिससे महामारी का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया। क्लूगे ने कहा कि कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के कारण 2020 की गर्मियों और सर्दियों में मौतें हुईं और फिर लॉकडाउन लगा। उन्होंने कहा कि हमें फिर वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए।