भारत और चीन ने आपसी विश्वास और समझ की बहाली की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। बुधवार को लाओस में आसियान की बैठक से इतर चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2020 में सीमा पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण हिंसक झड़प से सबक लेने का आह्वान किया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात, पूर्वी लद्दाख के टकराव के दो बिंदुओं से सैनिकों की पूर्ण वापसी के हफ्तों बाद हुई है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में सिंह ने जोर दिया कि भारत-चीन में सौहार्दपूर्ण संबंधों का वैश्विक शांति और समृद्धि पर अच्छा असर पड़ेगा। सिंह ने कहा, दोनों पड़ोसी हैं, इसलिए हमें संघर्ष के बजाय सहयोग पर ध्यान देना जरूरी है। सिंह ने 2020 में सीमा पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण झड़पों से सीखे गए सबक पर विचार करने, और सीमा पर शांति-स्थिरता का आह्वान किया।
सीमा पर तनाव कम करने पर जोर
मंत्रालय के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने सीमा पर तनाव घटाने पर जोर दिया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच विश्वास का निर्माण होगा। लगभग साढ़े चार के अंतराल के बाद दोनों पक्षों ने इन इलाकों में गश्त भी शुरू की है।
तीन दिन की लाओस यात्रा पर रक्षा मंत्री
राजनाथ आसियान व उसके संवाद सहयोगियों के रक्षा मंत्रियों (एडीएमएम-प्लस) की बैठक में शामिल होने के लिए तीन दिन की यात्रा पर बुधवार को ही वियतनाम पहुंचे हैं।
डोंग जून ने किया राजनाथ सिंह का स्वागत
चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने लाओस में 11वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम प्लस) के दौरान द्विपक्षीय बैठक के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया। बता दें कि एडीएमएम-प्लस एक मंच है जिसमें 10 देशों का आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) और इसके आठ संवाद साझेदार - भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
बता दें कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने पिछले महीने के अंत में डेमचोक और देपसांग में सैनिकों को पीछे हटाने की कवायद पूरी की थी। दोनों पक्षों ने लगभग साढ़े चार साल के अंतराल के बाद दोनों क्षेत्रों में गश्ती गतिविधियों को फिर से शुरू किया।