यू्क्रेन और भारत के बीच अहम समझौता
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यूक्रेन युद्ध में रूसी टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट कर चर्चा में आई अमेरिका की एफजीएम-148 जैवलिन टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल अब भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगी। सेना ने इस गाइडेड मिसाइल प्रणाली को खरीदने के लिए आधिकारिक स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। सौदे के तहत सेना को 100 जैवलिन मिसाइलें और 25 स्पेशल लॉन्चिंग यूनिट मिलेंगी। साथ ही जवानों की ट्रेनिंग के लिए सिमुलेटर, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी मदद भी मिलेगी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर इसे भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में अहम पड़ाव बताया। इस प्रणाली को अमेरिका की रक्षा कंपनियां आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन मिलकर बनाती हैं।
चीन-पाकिस्तान सीमा पर बेहद उपयोगी
पैदल ही ले जाने की क्षमता के कारण इसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है।
90% सफलता का दावा
2022 में यूक्रेन ने जैवलिन से रूसी टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को भारी नुकसान पहुंचाया। दावा किया गया कि जैवलिन की सफलता दर 90 फीसदी से अधिक है। हालांकि बाद में विश्लेषणों के बाद इसकी सफलता दर 65% तक बताई।
100 मिसाइलें और 25 स्पेशल लॉन्चिंग यूनिटें सेना को मिलेंगी
- मारक क्षमता : 2.5 किमी मारक क्षमता है मूल प्रणाली की, जिसे 4 किमी तक बढ़ाया जा सकता है।
30 इंच से अधिक मोटे लोहे के कवच को भेद सकता है
- दागो और भूल जाओ : लक्ष्य तय होने के बाद मिसाइल खुद ट्रैक करती है। दिशा देने की जरूरत नहीं। टैंक की छत को निशाना बनाती है।
- पोर्टेबल सिस्टम के कारण अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिक अपेक्षाकृत तेजी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
धनुषाकार उड़ती है मिसाइल
इसे लॉन्च करने के तुरंत बाद सैनिक स्थिति बदल सकते हैं, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बच सकते हैं।