कॉप-29 के तीसरे दिन, जलवायु वित्त के नए लक्ष्य एनसीक्यूजी के मसौदे पर गहरी बहस शुरू हो गई, जिसका उद्देश्य 2025 में समाप्त होने वाली 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वार्षिक जलवायु वित्त प्रतिबद्धता को बदलना है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में लगभग 130 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह जी77 और चीन ने मंगलवार को नए जलवायु वित्त लक्ष्य के मसौदे को नकार दिया। यह मसौदा इस साल बाकू में हो रहे जलवायु शिखर सम्मेलन में मुख्य मुद्दा था। इस मसौदे में देशों को वित्तीय स्रोतों, वितरण तंत्र और लक्ष्यों पर विचार करने की आवश्यकता थी। कुछ G7 देशों, जैसे कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड ने विकसित देशों से अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने और नेतृत्व करने का आग्रह किया। ब्राजील ने 2035 तक अपने उत्सर्जन को 59-67% तक कम करने का लक्ष्य घोषित किया।
विकासशील देशों की जरूरतों के हिसाब से हो जलवायु वित्त का लक्ष्य
ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) के सीईओ अरुणाभा घोष ने कहा कि जलवायु वित्त का लक्ष्य विकासशील देशों की जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एनसीक्यूजी कम से कम 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष होना चाहिए, जिसमें बड़े पैमाने पर अनुदान और रियायती वित्त शामिल होगा।'
इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ की प्रोफेसर पूर्णमिता दासगुप्ता ने जलवायु वित्त के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनसीक्यूजी को 'रणनीतिक और प्रभावी' होना चाहिए, ताकि पिछले वादों की तरह कोई कमी न हो।
मसौदा बहुत लंबा और दोहराव वाला था: लोपेज़
ट्रांसफ़ॉर्मा में क्लाइमेट डिप्लोमेसी निदेशक एलेजांद्रा लोपेज़ ने जी77 देशों के असंतोष को उजागर किया, जिसके कारण प्रारंभिक मसौदे को खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि यह मसौदा बहुत लंबा और दोहराव वाला था। यह बातचीत के लिए एक व्यावहारिक पाठ नहीं था। इस अस्वीकृति के बाद, सह-अध्यक्षों को एक नया, संक्षिप्त और सुव्यवस्थित मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया।
65 पृष्ठों से घटाकर 10 किया गया मसौदा, फिर भी दिखा असंतोष
इस प्रक्रिया की जटिलता को समझते हुए, एनआरडीसी में जलवायु वित्त के वरिष्ठ वकील जो थ्वाइट्स ने कहा कि मसौदा कई बार घटाया गया, लेकिन फिर भी कई पक्ष इससे खुश नहीं थे। उन्होंने कहा, 'पाठ 65 पृष्ठों से शुरू हुआ, फिर घटाकर 35 कर दिया गया, फिर 10 पृष्ठों का कर दिया गया। लेकिन, जैसा कि एलेजांड्रा ने कहा, बहुत सारे पक्ष हैं जो इससे खुश नहीं थे।'
लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के जलवायु वित्त समूह के संस्थापक सैंड्रा गुज़मैन ने भी यह बताया कि देशों को यह महसूस होना चाहिए कि उनके दृष्टिकोणों को मसौदे में शामिल किया जा रहा है, ताकि वे संतुलित महसूस करें। उन्होंने चुनौती की ओर इशारा करते हुए बताया, 'कुछ समूहों के प्रस्ताव कोष्ठक में थे और अन्य नहीं, जिससे असुविधा और असंतुलन की भावना पैदा हो रही थी।'
मजबूत और स्पष्ट जलवायु वित्त लक्ष्य की आवश्यकता पर जोर
सभी हितधारकों ने एक मजबूत और स्पष्ट जलवायु वित्त लक्ष्य एनसीक्यूजी की आवश्यकता पर जोर दिया, जो विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करे। जर्मन वॉच में फ्यूचर-प्रूफ फाइनेंस के प्रमुख डेविड रायफिश ने कहा कि समय कम है और कुछ मसौदे के हिस्से, जैसे पारदर्शिता और वित्त तक पहुंच, समझौते के लिए महत्वपूर्ण बिंदु हो सकते हैं। साथ ही, गुज़मैन ने कहा कि लक्ष्य सिर्फ संख्याओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अनुकूलन, हानि और क्षति के लिए लक्षित वित्त पर भी ध्यान देना चाहिए। अंत में, रायफिश ने कहा कि विकसित देशों को वित्त को विकासशील देशों तक पहुंचाने के लिए 'निवेश लक्ष्य' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।