कर्ज में डूबा पाकिस्तान अपने रणनीतिक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) परियोजना को आगे बढ़ा रहा है जबकि कोरोना वायरस संकट की वजह से देश में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है। यह परियोजना 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 45 खरब 56 अरब 85 करोड़ रुपये) की है।
सीपीईसी प्राधिकरण के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट-जनरल (सेनानिवृत्त) असीम सलीम बाजवा ने बुधवार को पत्रकारों के एक समूह को बताया, 'इसके रास्ते में किसी तरह की कोई राजनीतिक अड़चन नहीं है। यह परियोजना पाकिस्तान के भविष्य के साथ-साथ एक मूर्त वास्तविकता है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।'
उन्होंने कहा कि परियोजना को पूरा करने का काम तेज गति से चल रहा है। पाकिस्तान अपने हित में फैसले लेता है और इसमें किसी तरह का कोई शक नहीं है कि सीपीईसी परियोजना देश के सर्वोत्तम हित में है और इसे लेकर किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत सीपीईसी को लेकर अपना विरोध दर्ज करा चुका है। इसकी वजह है परियोजना का पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरना। इस परियोजना के तहत चीन के झिंजियांग प्रांत को सड़कों, रेलवे और ऊर्जा परियोजनाओं के एक नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ा जा रहा है।
अमेरिका गैर-पारदर्शी होने की वजह से इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा वाली परियोजना की आलोचना करता रहा है। अमेरिका का कहना है कि इसमें विश्व बैंक द्वारा ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को ठेके मिले हैं, जिससे पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने महामारी और इसके आर्थिक प्रभाव से लड़ने के लिए बहुपक्षीय दानदाताओं से अतिरिक्त धन की मांग की है।
पाकिस्तान में अबतक कोविड-19 के 24 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या 564 से ऊपर पहुंच चुकी है। पिछले महीने पाकिस्तान ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.39 बिलियन अमेरीकी डॉलर (लगभग एक खरब, पांच अरब, 55 करोड़ रुपये) का आपातकालीन ऋण प्राप्त किया था।