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Paris Club: पेरिस क्लब से मिली श्रीलंका को ऋण राहत, लेकिन क्या चीन दिखाएगा ऐसी उदारता?

Mon, 05 Dec 2022 04:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Paris Club: अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि श्रीलंका का राजकोषीय घाटा बढ़ता जा रहा है और उसकी आर्थिक हालत में तुरंत सुधार के कोई लक्षण नहीं हैं। कुछ अर्थशास्त्रियों की राय है कि दस वर्ष बाद भी श्रीलंका अपना पूरा कर्ज उतारने की स्थिति में नहीं पहुंच सकेगा...
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Paris Club Sri Lanka - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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इस खबर से यहां राहत महसूस की गई है कि कर्जदाता देशों का समूह पेरिस क्लब श्रीलंका से कर्ज वसूली पर दस साल की रोक लगाने के प्रस्ताव पर सहमत हो गया है। इस खबर के मुताबिक पेरिस क्लब में इस बात पर भी सहमति बनी है कि दस साल की अवधि पूरी होने के बाद श्रीलंका को अपना कर्ज चुकाने के लिए 15 साल का समय दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने श्रीलंका के लिए 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज पिछले सितंबर में मंजूर कर लिया था। लेकिन साथ ही यह शर्त लगा दी कि उसके कर्जदाता देशों के कर्ज वसूली की नई समयसारणी पर राजी होने के बाद ही ये रकम दी जाएगी।

विश्लेषकों के मुताबिक इस लिहाज से पेरिस क्लब में बनी सहमति महत्त्वपूर्ण है। इसके बावजूद इसका यह मतलब नहीं है कि श्रीलंका को आईएमएफ से कर्ज की किस्तें मिलने का रास्ता साफ हो गया है। पेरिस क्लब धनी देशों का समूह है। चीन और भारत इसका हिस्सा नहीं हैं। जबकि श्रीलंका के कर्जदाताओं में ये दोनों देश भी प्रमुख हैं। श्रीलंका पर मौजूद कुल कर्ज में इन दोनों देशों का हिस्सा लगभग 50 फीसदी है। पेरिस क्लब ने इन दोनों देशों से बातचीत करने का इरादा जताया है, लेकिन यह साफ किया गया है कि अभी तक उसने चीन और भारत से संपर्क नहीं किया है।

जानकारों के मुताबिक आईएमएफ की मार्च में होने वाली अगली बैठक तक श्रीलंका को कर्ज की रकम मिलने की संभावना नहीं है। मार्च की बैठक में भी आईएमएफ तभी ये रकम जारी करेगा, अगर तब तक चीन और भारत कर्ज राहत देने पर सहमत हो जाते हैँ। श्रीलंका पर चीन का लगभग सात बिलियन डॉलर और भारत का 80 करोड़ डॉलर का कर्ज है। इसके अलावा भारत सरकार ने श्रीलंका को आर्थिक संकट से निपटने के लिए चार बिलियन बिलियन डॉलर का आपात कर्ज भी दिया है। चीन की निजी कंपनियों का कर्ज भी अलग से है।

श्रीलंका पर कुल 40 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज है। अखबार डेली मिरर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के अंत तक श्रीलंका सरकार पर मौजूद कर्ज की मात्रा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 115.3 फीसदी के बराबर हो चुकी थी। जून 2022 में यह अनुपात 143.7 फीसदी तक पहुंच गया। इसकी एक बड़ी वजह डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये की कीमत में आई भारी गिरावट रही है।

अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि श्रीलंका का राजकोषीय घाटा बढ़ता जा रहा है और उसकी आर्थिक हालत में तुरंत सुधार के कोई लक्षण नहीं हैं। कुछ अर्थशास्त्रियों की राय है कि दस वर्ष बाद भी श्रीलंका अपना पूरा कर्ज उतारने की स्थिति में नहीं पहुंच सकेगा। इसलिए इसे जरूरी माना जा रहा है कि सिर्फ कर्ज वसूली में राहत देने के बजाय कर्जदाता देश ऋण माफी पर सहमत हों। डेली मिरर के मुताबिक श्रीलंका सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती चीन को कर्ज राहत पर राजी करने की है। चीन ने अभी तक ऐसी कोई राहत देने का संकेत नहीं दिया है।

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