अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका के कैलिफोर्निया में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। यहां सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर के बाहर दो किशोर हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हमले में तीन पुरुषों की जान चली गई। मरने वालों में एक सुरक्षाकर्मी भी शामिल है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच 'हेट क्राइम' यानी नफरत की वजह से किए गए अपराध के रूप में कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस घटना पर दुख जताया है।
क्या बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक भयानक घटना बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की गंभीरता से जांच करेगी। पुलिस को हमले के कुछ देर बाद पास की एक गली में खड़ी एक कार से दो किशोरों के शव मिले। इनकी उम्र 17 और 19 साल थी। पुलिस का मानना है कि मस्जिद पर हमला करने के बाद इन दोनों ने खुद को गोली मार ली और आत्महत्या कर ली।
कब हुआ हमला?
यह गोलीबारी दोपहर से कुछ पहले मस्जिद परिसर के बाहर हुई। सैन डिएगो का यह इस्लामिक सेंटर इस काउंटी का सबसे बड़ा केंद्र है। फायरिंग की आवाज सुनते ही वहां मौजूद लोगों और छात्रों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। रिपोर्ट से अनुसार, सैन डिएगो पुलिस प्रमुख स्कॉट वाह्ल ने बताया कि मस्जिद परिसर में चल रहे स्कूल के सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई है।
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पुलिस ने बताया कि इमारत के बाहर तीन लोग मृत मिले थे। अधिकारियों ने मृत सुरक्षाकर्मी की बहादुरी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी ने अपनी जान पर खेलकर शायद एक बड़ा कत्लेआम होने से रोक लिया। अब एफबीआई (FBI) भी इस जांच में शामिल हो गई है ताकि हमले की पूरी कड़ी जोड़ी जा सके।
जांच में क्या?
जांच में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। एक हमलावर अपने माता-पिता के घर से हथियार लेकर आया था। उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें नस्ली गौरव (Racial Pride) से जुड़ी बातें लिखी हैं। इसके अलावा, एक हथियार पर नफरत भरे संदेश भी लिखे मिले हैं। मस्जिद से कुछ ही दूरी पर एक माली पर भी गोलियां चलाई गईं, हालांकि वह सुरक्षित है। पुलिस अभी यह पता लगा रही है कि क्या उस घटना का इस हमले से कोई संबंध है।