भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहीम के टॉप सहयोगी माने जाने वाले जाबिर मोती की यहां की जेल से अमेरिका की जेल में प्रत्यर्पण के मामले में अनोखी दलील का इस्तेमाल किया गया। मोती के वकील एडवर्ड फिट्जेराल्ड ने अदालत में कहा कि अमेरिका की जेलों की हालत सही नहीं है और अगर उनके मुवक्किल मोती को जबरन वहां भेजा गया तो हो सकता है कि वह वहां आत्महत्या कर ले।
यह मामला लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा है। मोती पर आरोप है कि उसने आपराधिक नेटवर्क के जरिए 14 लाख डॉलर के काले धन को सफेद बनाया।मोती के वकील ने अदालत के सामने अमेरिकन फाइनेंसर और यौन अपराधों के दोषी जेफ्री एपस्टीन की एक नजीर भी पेश की।
एपस्टीन ने ऐसे मामले में आत्महत्या कर ली थी। मोती के वकील ने जोरदार पैरवी करते हुए सोमवार को अदालत में दो लोगों की वीडियोलिंक के जरिए गवाही भी दिलवाई। ये लोग अमेरिका में रिटायर्ड जेल वार्डन थे।
इनकी मदद से वकील ने यह साबित करने की कोशिश की कि अगर न्यूयार्क की जेल में मोती का प्रत्यर्पण हुआ तो एपस्टीन के मामले के दोहराव होने की पूरी आशंका है। अब इस मामले में अदालत 27 नवंबर को फैसला सुना सकती है।