उत्तर कोरिया से देश से बाहर निकलने वाले लोगों यानी करीब एक हजार डिफेक्टर्स का निजी डाटा लीक हुआ है। दक्षिण कोरियाई यूनिफिकेशन मंत्रालय के मुताबिक, ये डाटा दक्षिण कोरिया के पुनर्वास केंद्र के एक कंप्यूटर के हैक होने के बाद लीक हुआ है। ये मंत्रालय दक्षिण कोरिया में लोगों के पुनर्वास से जुड़े मामलों को देखता है।
इस केंद्र के एक निजी कंप्यूटर में ऐसा कोड पाया गया, जिससे ये हैकिंग संभव हुई। मंत्रालय का कहना है कि उत्तर कोरिया के डिफेक्टर्स से जुड़ा ये पहला मामला है, जिसमें बड़े स्तर पर जानकारियां लीक हुई हैं।
हैकर्स की पहचान और साइबर हमला कहां से हुआ है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है। उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया अक्सर दक्षिण कोरिया में रहने वाले उन डिफेक्टर्स को धमकाता रहा है, जो उत्तर कोरियाई सत्ता के ख़िलाफ़ बोलते रहते हैं।
हालांकि दक्षिण कोरिया सरकार ने इस हैकिंग को लेकर अभी उत्तर कोरिया पर कोई उंगली नहीं उठाई है। लेकिन साइबर सुरक्षा मामलों के जानकार कई बार उत्तर कोरिया की तरफ से बढ़ते हैकिंग के मामलों को लेकर आगाह कर चुके हैं।
अतीत में उत्तर कोरिया से जुड़ा हैकिंग का बड़ा मामला साल 2014 का है। जब सोनी इंटरटेंमेंट के बिजनेस को प्रभावित करने की कोशिश हुई थी। इस साइबर हमले में कंपनी के ई-मेल और निजी जानकारियां लीक हुई थीं।
करीब 977 डिफेक्टर्स को ये बताया गया है कि उनके नाम, जन्म की तारीख और पते लीक हुए हैं। हालांकि ये अभी साफ नहीं है कि इसका असर क्या होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि लीक हुए डाटा की वजह से इन डिफेक्टर्स के उत्तर कोरिया में रहने वाले परिवार को लेकर कुछ चिंताएं हैं।