सौभाग्य की प्रतीक है दारुमा डॉल
जापान में दारुमा डॉल को शुभ, सौभाग्य, धैर्य और लक्ष्य को पूरा करने का प्रतीक माना जाता है। गुन्मा स्थित ताकासाकी शहर प्रसिद्ध दारुमा डॉल का जन्मस्थान है। दारुमा डॉल गोल होती है और इसके हाथ-पैर नहीं होते हैं। इस डॉल की खासियत यह होती है कि यह गिरकर वापस सीधी खड़ी हो जाती है। इससे जुड़ी कहावत है कि सात बार गिरो, आठ बार खड़े हो। इसका मतलब है कि हार मानने के बजाय बार-बार उठ खड़ा होना। इस डॉल को लेकर मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति लक्ष्य या इच्छा तय करता है तो गुड़िया की एक आंख काली कर दी जाती। जब लक्ष्य पूरा हो जाता है तो दूसरी आंख भी भर दी जाती है।
भारतीय बौद्ध भिक्षु ने जापान में किया था बौद्ध को स्थापित
जापान में बौद्ध धर्म की स्थापना भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म ने की थी। वे एक हजार साल पहले जापान गए थे। उनको जापान में दारुमा दाशी के नाम से जाना जाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि दारुमा दाशी को जेन बौद्ध धर्म का भी एक आधारभूत व्यक्ति माना जाता है।