तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने साइप्रस की राजधानी में आयोजित सैन्य परेड के बाद कहा, 'जातीय रूप से विभाजित साइप्रस में संकट का समाधान करने के लिए वे 'दो-राज्य समझौते' का समर्थन करते हैं। इस विवादास्पद शांति समझौते को लेकर अर्दोआन की इस टिप्पणी के मायने क्या हैं? आइए समझें
पश्चिम एशिया में बीते 21 महीने से अधिक समय से संघर्ष हो रहा है। इस्राइल-हमास के अलावा कई देशों के बीच भी टकराव हो रहे हैं। अब तुर्किये के राष्ट्रपति ने एक अन्य देश साइप्रस में जातीय विभाजन के बीच संकट को खत्म करने के प्रयास से जुड़ा बयान दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जातीय विभाजन का दंश झेल रहे साइप्रस के संकट का समाधान करने के लिए वे 'दो-राज्य समझौते' का पूरा समर्थन करेंगे। बता दें कि 51 साल पहले इस द्वीप राष्ट्र का विभाजन हुआ था।
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दरअसल, साइप्रस पर तुर्किये के सैन्य आक्रमण को 51 साल पूरे हो चुके हैं। पांच दशक से भी पहले हुई इस सैन्य कार्रवाई के बाद यह द्वीप राष्ट्र जातीय आधार पर विभाजित हो गया और आज भी इसका दंश झेल रहा है। इसी बीच तुर्किये के राष्ट्रपति अर्दोआन ने उस समझौते का समर्थन किया है जिसमें दो अलग-अलग राज्यों की स्थापना की परिकल्पना की गई है।