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कर्लिंग स्टोन: वैज्ञानिक नहीं समझ पाए बर्फ पर इसकी चाल, 100 वर्ष का शोध; फिर भी पत्थर के मुड़ने का राज अनसुलझा

Tue, 24 Feb 2026 03:32 AM IST
लव गौर अमर उजाला नेटवर्क

सार

Curling Stone:  सौ साल से अधिक शोध के बावजूद विज्ञानी यह नहीं समझ पाए हैं कि भारी ग्रेनाइट कर्लिंग स्टोन बर्फ पर चलते हुए अपेक्षा के उलट दिशा में क्यों मुड़ जाते हैं। कर्लिंग बर्फ पर खेला जाने वाला एक शीतकालीन ओलंपिक खेल है, जिसे अक्सर बर्फ पर शतरंज भी कहा जाता है।
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कर्लिंग स्टोन - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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इटली में 22 फरवरी को हुए शीतकालीन ओलंपिक खेलों में खिलाड़ी हर दिन प्रकृति के नियमों को चुनौती देते दिखे। वैज्ञानिकों के लिए सबसे दिलचस्प खेल कर्लिंग बना। सौ साल से अधिक शोध के बावजूद विज्ञानी यह नहीं समझ पाए हैं कि भारी ग्रेनाइट कर्लिंग स्टोन बर्फ पर चलते हुए अपेक्षा के उलट दिशा में क्यों मुड़ जाते हैं। कर्लिंग बर्फ पर खेला जाने वाला एक शीतकालीन ओलंपिक खेल है, जिसे अक्सर बर्फ पर शतरंज भी कहा जाता है। इसमें ताकत से ज्यादा रणनीति, सटीक निशाने और टीमवर्क की भूमिका होती है। यह पहली बार 1924 में शामिल हुआ।
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सामान्य भौतिकी से उलटा व्यवहार
यहीं से असली वैज्ञानिक उलझन शुरू होती है। आम तौर पर अगर आप किसी गोल वस्तु  जैसे कटोरे को फर्श पर आगे की ओर धक्का देते हुए घड़ी की दिशा में घुमाएं, तो वह बाईं ओर मुड़ेगा। लेकिन कर्लिंग स्टोन ठीक इसका उलटा करता है।

इस रहस्य को सुलझाने के लिए कोई सिद्धांत पूरी तरह निर्णायक साबित नहीं हुआ। कनाडाई सस्केचेवान विवि, सैसकटून में विंटर स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग का शोध करने वाले सीन मॉ कहते हैं कि जब पत्थर घड़ी की दिशा में घूमता है, तो उसका रनिंग बैंड यानी नीचे की वह खुरदरी गोल पट्टी जो सीधे बर्फ के संपर्क में रहती है पेबल्ड सतह पर महीन खरोंचें बना देती है।
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पिवट–स्लाइड मॉडल की परिकल्पना  
2016 में भौतिकविदों ने शोध पत्र छापा, जिसमें पिवट–स्लाइड मॉडल पेश किया गया। इस सिद्धांत के मुताबिक पत्थर की पूरी घुमावदार यात्रा असल में कई बेहद छोटे-छोटे मूवमेंट्स से बनी होती है। अगर पत्थर घड़ी की दिशा में घूम रहा हो, तो उसके दाईं ओर का कोई बिंदु कभी-कभी बर्फ में अटक जाता है। इससे पत्थर हल्का सा घूमता है (पिवट करता है), फिर छूटकर आगे फिसल जाता है। यशोध के सह-लेखक भौतिक विज्ञानी मार्क शिगेल्स्की हैं। यह पिवट स्लाइड मॉडल की परिकल्पना है।
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