नेपाल के मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरने पर कई इलाकों से कर्फ्यू हटा दिया गया है। 26 जुलाई को शुरू हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हुई थी। संवेदनशील क्षेत्रों में निषेधाज्ञा जारी है, जबकि शांति बहाली के लिए सरकार और एक धार्मिक संगठन के बीच 13 सूत्रीय समझौता हुआ है।
नेपाल के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए प्रशासन ने मधेश और कोशी प्रांत के कई इलाकों में लगाया गया कर्फ्यू हटा दिया है। हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में अभी भी निषेधाज्ञा (धारा 163 के तहत प्रतिबंध) लागू रहेगी और सुरक्षा बल तैनात रहेंगे।
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कैसे शुरू हुआ था विवाद?
यह हिंसा 26 जुलाई को भारत से सटे सुनसरी जिले में शुरू हुई थी। यहां दो अलग-अलग समुदाय अपने-अपने कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे। इस दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। बाद में हिंसा आसपास के जिलों तक फैल गई। इस हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें दो लोगों की सुनसरी जिले और एक व्यक्ति की सिराहा जिले में जान गई।
कई जिलों में हटाया गया कर्फ्यू
प्रशासन के अनुसार, सप्तरी जिले के अधिकांश हिस्सों से कर्फ्यू हटा लिया गया है। अब केवल राजबिराज नगर पालिका समेत दो इलाकों में निषेधाज्ञा लागू है।
धनुषा जिले में भी शनिवार से कर्फ्यू समाप्त कर दिया गया है। हालांकि कुछ संवेदनशील स्थानों पर एहतियात के तौर पर प्रतिबंध जारी हैं।
पर्सा जिले के बीरगंज महानगर के कुछ हिस्सों में रात के समय प्रतिबंध लागू रहेगा। शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक चार से अधिक लोगों के एकत्र होने और सार्वजनिक सभाओं पर रोक है।
वहीं सिराहा जिले के कई इलाकों से कर्फ्यू पूरी तरह हटा लिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसमें ढील दी गई है।
शांति और भाईचारे के लिए निकाली गईं रैलियां
हिंसा के बाद मधेश प्रांत के कई शहरों में शांति रैलियां आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक सौहार्द, एकता और भाईचारा बनाए रखना है।
सरकार और धार्मिक संगठन के बीच समझौता
इस बीच, नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरूंग की पहल पर जनकपुरधाम (धनुषा) में सरकार और एक धार्मिक संगठन के बीच 13 सूत्रीय समझौता हुआ है। इस समझौते का मकसद क्षेत्र में शांति बनाए रखना, सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना और प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को समाप्त करना है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाएगी ताकि किसी भी तरह की नई हिंसा को रोका जा सके।