तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक से निराशा हाथ लगने के बाद अब अमेरिका ने अपनी उम्मीद वेनेजुएला से जोड़ी है। इसके लिए वह वेनेजुएला पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी कर रहा है। वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध लंबे समय से लागू हैं। इस बीच वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर भी पाबंदी लगाने की धमकी अमेरिका देता रहा है। लेकिन पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच वह खुद उससे तेल खरीदने की तैयारी में है।
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक विशेष खबर के मुताबिक अमेरिका और वेनेजुएला की सरकारों के बीच हाल में एक मोटी सहमति बन गई है। अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ही वेनेजुएला से संपर्क साधा था। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बदले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार अमेरिकी कंपनी शेवरॉन को देश में तेल निकालने की इजाजत देगी। अनुमान है कि इससे अमेरिका और यूरोप को तेल की महंगाई से राहत मिलेगी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक मादुरो सरकार देश में अमेरिका समर्थित विपक्षी नेताओं से बातचीत करने को तैयार हो गई है। उनके बीच बातचीत 2024 में ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ चुनाव कराने के मुद्दे पर होगी। ये वार्ता शुरू के बदले अमेरिका अपने यहां जब्त करोड़ों डॉलर की वेनेजुएला की संपत्ति उसे लौटा देगा। प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला के लिए खाद्य पदार्थों, दवाओं और बिजली एवं पानी संयंत्रों के लिए जरूरी उपकरणों का आयात करना मुश्किल बना रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि समझौते के विवरण पर अभी बातचीत चल रही है। उन्होंने आगाह किया कि अभी भी संभव है कि आखिरी वक्त ये बातचीत नाकाम हो जाए। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला से समझौता होने से विश्व ऊर्जा बाजार को सकारात्मक संदेश जाएगा। इससे ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका से पीड़ित लोगों को राहत मिलेगी।
वेनेजुएला एक समय दुनिया में तेल का एक बड़ा उत्पादक और सप्लायर था। 1990 के दशक में वह रोज 32 लाख बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन करता था। लेकिन वहां वामपंथी सरकार बनने के बाद अमेरिका ने उस पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए। उधर वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल कंपनियों को देश से निकाल दिया। जिन कंपनियों को निकाला गया, उनमें शेवरॉन भी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक बीते दो दशकों से तेल क्षेत्र में पर्याप्त निवेश ना होने के कारण वेनेजुएला की तेल उत्पादन की क्षमता फिलहाल कमजोर बनी हुई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि वेनेजुएला से अमेरिका का समझौता इस महीने के आखिर तक हो जाने की संभावना है। लेकिन इससे अमेरिका के अंदर राष्ट्रपति जो बाइडन को कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के प्रति अधिक सख्त नीति अपनाई थी। अब रिपब्लिकन पार्टी बाइडेन पर एक ‘तानाशाही’ व्यवस्था वाले देश के साथ संबंध बनाने का इल्जाम लगा सकती है।
अनुमान है कि वेनेजुएला में भी वामपंथी समूहों में अमेरिका से रिश्ता सुधारने की नीति का विरोध हो सकता है। वेनेजुएला विशेषज्ञ जियोफ रामसे ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा- ‘मादुरो सरकार के अंदर भी सख्त रुख रखने वाले लोग हैं, जो राष्ट्रपति मादुरो की नव-उदारवादी नीतियों का पहले से विरोध कर रहे हैँ।’ ये लोग अमेरिका से किसी समझौते के खिलाफ हैँ।