बांग्लादेश के सीमा बल का कहना है कि इंडो-बांग्ला फ्रंटियर पर सीमा पार से होने वाली तस्करी को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है। सीमा बल ने इस खतरे से निपटने के लिए बीएसएफ से अधिक से अधिक सहयोग की मांग की है। दोनों देशों की सीमा की सुरक्षा करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सीमा गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के लिए मवेशी, ड्रग्स और नशीले पदार्थों, चमड़ा, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी बड़ी चुनौती है।
11 जुलाई को पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश की सीमा पर बांग्लादेशी पशु तस्करों ने एक बम धमाका किया था। जिसमें बीएसएफ के एक जवान ने अपना एक हाथ खो दिया और उसे कई गंभीर चोटें भी आईं। पहचान ना बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय पशु तस्करों के एक बार बांलग्लादेश की सीमा पार पहुंचने पर उन्हें व्यापारी माना जाता है।
उन्होंने बताया कि तस्करों को अधिकारियों को 500 टका (करीब 400 रुपये) देने की जरूरत होती है। इसके बाद वह पशुओं को जहां चाहें वहां स्वतंत्र रूप से बेच सकते हैं। क्योंकि बांग्लादेश में पशुओं की काफी मांग है तो तस्कर सीमा पार कर पड़ोसी देश जाने का कोई मौका नहीं गंवाते। यहां वह आसानी से पैसा कमा सकते हैं।
अधिकारी ने कहा कि ये अपराधी सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों पर ही गोलियां चला देते हैं। बीते महीने बीएसएफ और बीजीबी की ढाका में बैठक भी हुई है। जिसमें अपराध और मवेशियों की तस्करी को बेहतर ढंग से जांचने के लिए सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में सीमा पर हो रही हत्याओं की घटनाओं को कम करने के लिए संयुक्त प्रयास करने का भी निर्णय लिया। बीएसएफ का कहना है कि वह तभी फायरिंग करते हैं जब स्थिति काफी खराब हो जाती है और उनके सैनिकों की जान खतरे में होती है। अधिकारियों का कहना है कि तस्कर काफी गरीब होते हैं और दो वक्त की रोटी के लिए वो ये सब करते हैं। उन्हें मारना सही तरीका नहीं है। हमें कानून के मुताबिक ही काम करना होगा।