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अमेरिका: सॉफ्टवेयर से निर्दोष बनाए जा रहे अपराधी, अश्वेतों के प्रति किया जा रहा पक्षपात

Fri, 01 Jan 2021 06:28 AM IST
Kuldeep Singh न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क
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Facial Recognition - सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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अमेरिका में अपराधियों को पकड़ने के लिए चेहरा पहचानने के सॉफ्टवेयर उपयोग किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी वजह से निर्दोषों को गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में एक अश्वेत को कैंडी टॉफियां चुराने के आरोप में पकड़ कर पुलिस ने 10 दिन जेल में रखा था। अब पीड़ित ने पुलिस प्रशासन और अभियोजन पक्ष के खिलाफ नागरिक अधिकार हनन और झूठे इल्जाम का मुकदमा किया है।

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अमेरिका में चेहरा पहचानने में भेदभाव के मामले
इस 33 साल के व्यक्ति निजीर पार्क्स पर जनवरी 2019 में एक दुकान से चोरी और पुलिस पर अपनी कार चढ़ाने के प्रयास के आरोप लगाए गए। चोरी के समय वह घटनास्थल से 30 मील दूर था। लेकिन चेहरा पहचानने (फेशियल रिक्गॉनिशन) के सॉफ्टवेयर ने उसे संदिग्ध बता दिया। पुलिस ने उसे पकड़कर 10 दिन जेल में रखा।


कानूनी सहायता के लिए पार्क्स को साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने पड़े। नवंबर में अदालत ने साक्ष्यों को गलत मानते हुए उसे रिहा कर दिया। पार्क्स अकेले निर्दोष नहीं है जो एक सॉफ्टवेयर की गलती की वजह से जेल गए। रॉबर्ट विलियम्स और माइकल ऑलिवर जैसे मामले भी सामने आए। आशंका है कि अदालत से बेगुनाही मिली तो कई और लोग सामने आ सकते हैं।
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इस तरह हुई गलती
घटना के समय आरोपी से पुलिस की कुछ देर बात हुई थी। पकड़े जाने पर वह चुराए सामान का पैसा देने को राजी था। पुलिस ने उसका लाइसेंस जांचा तो फर्जी निकला। पुलिस पकड़ने की कोशिश की तो वह किराये पर लिए कार में भाग निकला। पहचान के लिए उसे काला जैकेट में छह फीट के रूप में दर्ज किया गया।

फर्जी लाइसेंस की तस्वीर से चेहरा पहचानने के सॉफ्टवेयर ने उसे बता दिया। पार्क्स के अनुसार, तस्वीर उनकी नहीं है। पुलिस का यह सॉफ्टवेयर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपलोड लाखों-करोड़ों का विश्लेषण करके संदिग्ध की पहचान का दावा कर रहे हैं।

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