12 मार्च को आयोजकों ने करीब 2.50 लाख लोगों को एक साथ जुटने की अनुमति देने से इनकार करने की अपील की थी लेकिन लोग इस धार्मिक आयोजन की तैयारी में शिविरों में जुट गए। सबसे बड़ी बात यह रही कि यह आयोजन उस वक्त हुआ जब लाहौर में बारिश हो रही थी। इस कारण इसके प्रसार की गुंजाइश और अधिक है। यह आयोजन पाक मौलवियों की निष्क्रियता का एक उदाहरण था।
कोरोना वायरस के चलते ईरान ने अपने देश में पवित्र शिया स्थलों को बंद कर दिया है जबकि सऊदी अरब ने मस्जिदों में नमाज पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनके अलावा तुर्की, यूएई, लेबनान, इराक और जॉर्डन समेत कई मुस्लिम देशों ने मस्जिदों को बंद कर दिया है। जबकि पाकिस्तान ने 20 मार्च को देश भर में जुमे की नमाज की अनुमति दी थी।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस के संक्रमण के शनिवार तक 1,408 मामले पाए गए हैं। इनमें से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कुल संक्रमितों में से सात की हालत काफी गंभीर है। बताया गया कि अधिकांश संक्रमित लोग ईरान से आए थे जहां अब तक कोरोना से 2,300 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
इमरान सरकार की कई कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान के हर प्रांत में मस्जिदों के भीतर काफी भीड़ जमा हो रही है। शुक्रवार को कराची में 400 लोग मस्जिद में नमाज अदा करने पहुंचे। जब पुलिस ने मस्जिद प्रशासन को गेट बंद करने को बोला तो लोग भड़क गए। इन नमाजियों के सामने प्रशासन लाचार नजर आ रहा है।