वैश्विक स्तर पर हर पांच में से एक व्यक्ति को कोविड-19 महामारी के खतरनाक स्तर से जूझना पड़ सकता है। ये ऐसे लोग हैं, जो पहले ही मधुमेह, हृदय रोग या सांस में लेने की तकलीफ जैसी अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। अध्ययन में वैश्विक स्तर पर ऐसे करीब 1.7 अरब लोग होने की आशंका जताई गई है, जो वैश्विक आबादी का 22 फीसदी हिस्सा हैं।
लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के लिए अति संवेदनशील मानी गई इस आबादी में 5 फीसदी 20 साल से कम उम्र के युवा हैं, जबकि 66 फीसदी 70 साल या उससे भी ज्यादा उम्र के बुजुर्ग लोग हैं।
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन समेत इस अध्ययन से जुड़े सभी शोधकर्ताओं का मानना है कि इस संक्रमण के गंभीर स्तर से जूझने का खतरा उन देशों के लिए ज्यादा है, जहां आबादी के लिहाज से बुजुर्गों की संख्या अच्छी खासी तादाद में है।