पैनल ने पाया कि यह स्पष्ट दिखा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को जनवरी महीने में ही चीन में स्थानीय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अधिक बलपूर्वक लागू किया जा सकता था। इस पैनल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी आलोचना की है। पैनल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने 22 जनवरी, 2020 तक अपनी आपातकालीन समिति को भी इस महामारी संकट की सूचना नहीं दी और न ही बैठक बुलाई। समिति नोवल कोरोना वायरस को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में भी समय से पहले घोषित करने में असफल रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि समिति जनवरी के तीसरे सप्ताह तक क्यों नहीं मिली और न ही यह स्पष्ट है कि यह राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा पर सहमत क्यों नहीं हो पाई? जब से कोरोना वायरस का संकट पूरी दुनिया में गहराया तब से ही इसके जवाबी कार्रवाई में ढीलापन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की आलोचना हो रही है। महामारी को आपदा घोषित करने और फेस मास्क को अनिवार्य करने में देरी से उठाए गए कदमों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की आजतक आलोचना होती है। अमेरिकी की ओर से की गई आलोचना तो जगजाहिर है।
ट्रंप ने लगाए थे चीन और डब्ल्यूएचओ पर आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कोरोना को लेकर चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रति सख्त रुख अपनाया था। डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को चीन का कठपुतली तक कह दिया था और डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली आर्थिक मदद भी बंद कर दी थी।