अमेरिका में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संकेत देखे जा रहे हैं। अमेरिका के चार राज्यों एरिजोना, टेक्सास, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में ऐसे कई मामले आए हैं, जो दूसरी लहर के संकेत दे रहे हैं। जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर, पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन समेत कम से कम पांच संस्थाओं के शोधकर्ताओं ने अपने शोध इस बात का दावा किया है।
अमेरिका में टेक्सास, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया टॉप 10 संक्रमित राज्यों में शामिल हैं। जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर के रिसर्चर एरिक टोनर ने बताया कि कोरोना की नई लहर अभी छोटी और दूर दिखाई दे रही है, लेकिन यह अमेरिका के कुछ हिस्सों में उभर रही है।
उन्होंने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगा कि ये संक्रमण के मामले अनलॉक और रंगभेद के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में उमड़ी भारी भीड़ के कारण बढ़े हैं। ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि जॉर्जिया में हेयर सैलून, टैटू पार्लर और जिम डेढ़ महीने पहले खुल गए थे लेकिन वहां मामलों में गिरावट देखी जा रही है।
पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के जैव सांख्यिकी विभाग के निदेशक जेफरी मॉरिस का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए अब लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। एफडीए कमिश्नर स्टीफन हान ने कहा कि वे अनलॉक और बढ़ते मामलों के संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं, ऐसा देखा गया है कि एक हफ्ते में कहीं मामले अचानक बढ़े हैं तो कहीं एक भी मामला नहीं मिला है।
अमेरिका में अब तक 20,89,701 मामले आए हैं जिसमें से 1,16,034 मौतें हुई हैं। उधर, हार्वर्ड में ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के प्रमुख आशीष झा ने कहा है कि अमेरिका में कोरोना से मौतों का आंकड़ा सितंबर तक दो लाख के पार पहुंच सकता है।
अमेरिका में अकेले लॉस एंजिलिस में राज्य के 50 फीसदी नए केस सामने आए हैं लेकिन सैन फ्रांसिस्को में कोरोना का असर कम दिखाई पड़ रहा है। कैलिफोर्निया में मार्च के अंत में स्टे एट होम लगा था। अनलॉक के बाद फ्लोरिडा में एक हफ्ते में 8,553 केस आए हैं, जो अबतक का एक हफ्ते का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ज्यादा टेस्ट के कारण केस बढ़े हैं। वहीं एरिजोना में दो हफ्ते में मामले अचानक बढ़े हैं, यहां 24 घंटे में सबसे ज्यादा 1,556 नए केस आए हैं। इसके अलावा टेक्सास में कोरोना के 2,504 नए मामले आए हैं, जो एक दिन का सर्वाधिक आंकड़ा है।
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है कि कोरोना की बहुत जल्दी जांच से गलत नतीजे आ सकते हैं। इसके मुताबिक वायरस की जांच लक्षण दिखने के तीन दिन बाद करना बेहतर होता है। शोधकर्ताओं ने मरीजों की लार के 1,330 सैंपल लेकर विश्लेषण किया। टीम की सदस्य लॉरेन कुसिर्का ने कहा कि लक्षण होना या न होना संक्रमित होने की गारंटी नहीं है।