कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर)
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स्वीडन में स्वास्थ्य मामलों की देखरेख करने वाली PHA की वेबसाइट पर नजर डालें तो समझ आता है कि यह देश, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेता। नहीं मानता कि कोरोना का वायरस बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। या किसी वस्तु को छूने से भी फैल सकता है। जबकि WHO की माने तो कोरोना वायरस इंसानी लार की बूंदों से भी फैलता है।
खांसने या छींकने से भी इसके विषाणु संचरित होते हैं। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर घूमने से किसी से मिलने से आप पर खतरा बढ़ सकता है। कई रिसर्च से ये भी पता लगा है कि ये वायरस ग्लास और प्लास्टिक पर नौ दिन तक जीवित रह सकते हैं। कम तापमान में कुछ वायरस 28 दिन तक टिके रह सकते हैं। कोरोना वायरस को खासतौर पर इस बात के लिए जाना जाता है कि यह अपने अनुकूल माहौल में मजबूती से जमा रहता है।
कुछ वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में महामारी के दौरान स्वीडिश सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की आलोचना की है। लगभग 2,000 शिक्षाविदों ने सरकार को लिखे एक खुले पत्र में उसकी संक्रमण निवारण रणनीति में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की है।
स्वीडन में एक प्रतिष्ठित मेडिकल यूनिवर्सिटी कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर स्टेन लिनारेसन वायरस से निपटने के सरकार के रवैये की तुलना रसोई में आग जलने देने से की, जिसे बाद में बुझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है। डर इस बात का है कि कहीं ये आग पूरे घर को चपेट में न ले ले।
देशवासियों को गाइडलाइन जारी करते हुए यहां कि सरकार कहती है कि, 'बार-बार चेहरा न छूएं, साथ-साथ बीमार लोगों से भी संपर्क न बनाए। देश के पूर्व महामारी विशेषज्ञ और अब सरकारी निकाय स्वीडिश स्वास्थ्य एजेंसी के सलाहकार जोहान गीसेस्के ने कहा, 'स्वीडन की तस्वीर यूरोपीय देशों से अलग है और कम से कम यह अच्छी बात है।'
सरकार ने साफ किया है कि वे वायरस को शांत और नियंत्रित तरीके से रोकना चाहते हैं। यहां बड़े इवेंट्स पर रोक लगा दी गई है और यूनिवर्सिटीज बंद हैं। स्वीडन ने लोगों से घर से ही काम करने और लोगों से बिना वजह ट्रेवल नहीं करने के लिए कहा है। स्टॉकहोम में काफी लोग अकेले रहते हैं और अगर पाबंदियां लागू रहीं तो उनके लिए अकेलापन एक बड़ी समस्या हो सकती है।
सरकार घर बैठे इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए तमाम उपाय कर रही है। इस बीच कुछ ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जो कि व्यक्तिगत तौर पर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने समूह बनाकर मदद पहुंचाने का काम तेज कर दिया है ताकि लोगों को घर में रहने पर कम से कम दिक्कत का सामना करना पड़े।
फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सहारे कई ऐसे लोगों के समूह बन गए हैं, जो जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं। कुछ ऐसे एप्प भी हैं जिनसे अपने आस-पड़ोस की तमाम छोटी बड़ी जानकारी ली जा सकती है।
एक करोड़ की आबादी वाले स्वीडन में रविवार तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 3700 मामले सामने आ चुके हैं। 110 लोगों की मौत हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जांच की दर सीमित है। यहां के लोगों को विश्वास है कि स्वीडन के अनुभव इटली की तरह खतरनाक नहीं होंगे, जहां 10 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।