कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्रेयस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम कोरोना के सोर्स का पता लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ आप लोगों को आश्वस्त करना चाहता है कि कोरोना के सोर्स का पता लगाने के लिए हम वुहान से ही अपने अध्ययन की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हमें इस वायरस की उत्पत्ति को जानने की आवश्यकता है क्योंकि यह भविष्य में होने वाले प्रकोपों को रोकने में हमारी मदद कर सकता है।
बता दें कि अमेरिका दुनियाभर में महामारी फैलने के बाद से ही चीन पर हमलावर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना को 'चीनी वायरस' तक कह डाला था। सबसे पहले हुबेई के वुहान में संक्रमण फैलने की खबरें आई थीं, जिसके बाद यह दुनियाभर में फैल गया। चीन ने इस आरोप का खंडन किया और बाकी देशों ने उसके ऊपर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन पर भी चीन के साथ मिलकर दुनिया को अंधेरे में रखने के आरोप लगे हैं।
चीन ने भारत पर लगाया आरोप
चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों के एक दल ने कहा कि कोरोना वायरस संभवत: भारत में वर्ष 2019 की गर्मियों में पैदा हुआ था। इस चीनी दल ने दावा किया कि कोरोना वायरस पशुओं से दूषित जल के माध्यम से इंसान में प्रवेश कर गया। इसके बाद यह वुहान पहुंच गया, जहां से कोरोना वायरस की पहली बार पहचान हुई। हालांकि, ब्रिटेन की ग्लासगो यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ डेविड राबर्ट्सन ने डेली मेल से कहा था कि चीनी शोध बहुत दोषपूर्ण है और यह कोरोना वायरस के बारे में हमारी समझ में जरा भी वृद्धि नहीं करता है।