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एटमी हथियारों पर बैन लगाने के लिए साथ आए 51 देश, नॉर्थ कोरिया पर लगेगी लगाम

Thu, 21 Sep 2017 07:35 AM IST
एजेंसी/ संयुक्त राष्ट्र
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उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते परमाणु खतरे के बीच दुनिया के 51 देशों ने एटमी हथियारों को प्रतिबंधित करने वाली संयुक्त राष्ट्र की नई संधि पर हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया है। हालांकि इसका अमेरिका और दूसरे परमाणु संपन्न राष्ट्रों ने तीखा विरोध किया है। 
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वहीं ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमेर संधि पर हस्ताक्षर करने वाले पहले नेता बन गए हैं। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा और इंडोनेशिया, आयरलैंड, मलयेशिया, फिलिस्तीनी प्रशासन तथा वेटिकन ने भी संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

आस्ट्रिया, ब्राजील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के नेतृत्व में हुई वार्ता के बाद जुलाई में 122 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियार निषेध संधि को अपनाया था। लेकिन इस वार्ता में परमाणु हथियार से संपन्न नौ राष्ट्रों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इस्राइल ने हिस्सा नहीं लिया था।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर संधि पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू होने को संरा के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, ‘यह दो दशकों से ज्यादा समय के बाद अस्तित्व में आई पहली बहुपक्षीय हथियार निषेध संधि है। हालांकि उन्होंने माना कि दुनिया को 15,000 परमाणु हथियारों के भंडार से बाहर निकालने के लिए काफी काम किया जाना बाकी है।’ 

उन्होंने कहा, आज हम एक मंजिल पर पहुंचने का जश्न मना रहे हैं। अब हमें परमाणु हथियारों के खात्मे के कठिन रास्ते पर आगे बढ़ना जारी रखना होगा। यह संधि तब प्रभाव में आएगी जब 50 देश इस पर हस्ताक्षर और अनुमोदन कर देंगे। इस प्रक्रिया में कुछ महीने अथवा साल लग सकते हैं।

संधि पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए उनके पहले संबोधन के एक दिन बाद शुरू हुई है। ट्रंप ने कहा था कि अपनी अथवा अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए अमेरिकी उत्तर कोरिया को पूरी तरह तबाह कर देगा। 

उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों का निर्माण जारी रखने से दुनिया भर में चिंता का माहौल है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपना छठा और सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण किया है। इसके अलावा उसने हाल ही में दो अंतर महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलें भी दागी हैं।
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प्रतिरोधक के तौर पर विकसित किए एटमी हथियार 

- फोटो : Getty
परमाणु ताकतों का कहना है कि उन्होंने किसी एटमी हमले के प्रतिरोधक के तौर पर ये हथियार विकसित किए हैं। हालांकि वे परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) को लेकर प्रतिबद्ध हैं। दशकों पुरानी एनपीटी परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने और दुनिया की एटमी ताकतों पर अपना जखीरा घटाने का दबाव बनाती है। उधर, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस इस संधि को नहीं मानते। उनका दावा है कि वैश्विक सुरक्षा हालात और उत्तर कोरिया के एटमी कार्यक्रम को देखते हुए ऐसी प्रतिरोधक क्षमता की आवश्यकता है।

नाटो ने खारिज की संरा की संधि 
नाटो ने संयुक्त राष्ट्र की एटमी हथियार निषेध संधि को हकीकत से परे बताते हुए खारिज कर दिया है। उसने चेताया है कि इससे उत्तर कोरिया के एटमी हथियार कार्यक्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के कमजोर पड़ने का खतरा है। 

नाटो के सदस्य देशों, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने साफ कर दिया है कि उनका इस संधि में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। संरा में इस साल जुलाई में इस संधि को अपनाया गया था। लेकिन परमाणु संपन्न नौ राष्ट्रों ने न तो इस संधि की प्रक्रिया में हिस्सा लिया और न ही इसे लेकर हुई वोटिंग में शिरकत की। नाटो की ओर से कहा गया है कि यह संधि तेजी से चुनौतीपूर्ण होते जा रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के माहौल की हकीकत की उपेक्षा करती है।

आमने-सामने
29 देशों के पश्चिमी समूह ने संधि का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे समय जब उत्तर कोरिया के एटमी कार्यक्रम से दुनिया पर खतरा मंडरा रहा है, सबको एक रहने की जरूरत है। यह संधि इस तरह की तात्कालिक सुरक्षा चुनौतियों का हल देने में नाकाम है। एक संधि के जरिए परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने से ऐसे हथियार रखने वाला कोई भी देश प्रभावित नहीं होगा। वह न तो अपना एटमी जखीरा घटाएगा और न ही इससे विश्व में शांति एवं स्थिरता आएगी।

संधि की पैरवी करते हुए आस्ट्रिया के विदेश मंत्री सेबेस्टियन कुर्ज ने ये दलील खारिज कर दी कि सुरक्षा के लिए एटमी हथियार अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा, अगर इस समय की वैश्विक चुनौतियों को देखें तो यह कहानी न केवल झूठी है बल्कि खतरनाक है। परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध की यह संधि सुरक्षा का एक वास्तविक विकल्प उपलब्ध कराएगी। यह एटमी हथियारों से मुक्त ऐसी दुनिया होगी, जहां हर कोई सुरक्षित होगा और किसी को इनकी जरूरत नहीं होगी। 
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