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कोरोना से जंग: डब्ल्यूएचओ की टीका विशेषज्ञ ने कहा, बच्चों का टीकाकरण प्राथमिकता नहीं

Fri, 04 Jun 2021 08:38 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, जिनेवा

सार

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर बच्चों के संपर्क में आने वाले वयस्कों का टीकाकरण हो गया हो तो स्कूल भेजने से पहले बच्चों को टीकाकरण आवश्यक नहीं है। बता दें कि विश्व स्तर पर दिए गए कोविड टीकों का एक फीसदी से भी कम का उपयोग गरीब देशों में किया गया है। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शीर्ष टीका विशेषज्ञ डॉ. केट ओ'ब्रायन का कहना है कि दुनिया भर में टीकों की बेहद सीमित आपूर्ति के मद्देनजर कोरोना वायरस के खिलाफ बच्चों का टीकाकरण उच्च प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर बच्चों के कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होने या उनकी मौत होने का खतरा नहीं होता है, इसलिए महामारी के दौरान उनका टीकाकरण उन्हें बीमारी से बचाने के बदले संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से होता है।

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हालांकि ऐसे अमीर देशों की संख्या बढ़ती जा रही है जो किशोरों और बच्चों के लिए कोविड टीकाकारण की मंजूरी दे रहे हैं। कनाडा, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने हाल ही में 12 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए कुछ कोविड टीकों को मंजूरी दी है क्योंकि वे वयस्कों के लिए अपने टीकाकरण लक्ष्य तक पहुंचने वाले हैं। इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने अमीर देशों से अनुरोध किया था कि वे अपने किशोरों और बच्चों का टीकाकरण करने के बदले यह टीके गरीब देशों को दान दे दें। 

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भारत में पाया गया बी.1.617 स्वरूप ही अब चिंता का सबब: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि सबसे पहले भारत में पाए गए बी.1.617 कोविड-19 के तीन स्वरूप में से एक बी.1.617.2 ही अब चिंता का सबब है और बाकी के दो स्वरूप में संक्रमण फैलाने की दर बहुत कम है। बता दें कि बी.1.617 स्वरूप सबसे पहले भारत में पाया गया और ये तीन स्वरूप बी.1.617.1, बी.1.617.2 और बी.1.617.3 में विभाजित हैं।

बीते मंगलवार को प्रकाशित कोविड-19 साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि बी.1.617.1 और बी.1.617.2 स्वरूपों के लिए उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कर इस साल 11 मई को यह पता लगाया गया कि बी.1.617 वैश्विक ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ (चिंता का कारण) है। लोगों की जान को सबसे अधिक खतरा बी.1.617.2 वेरिएंट से है।

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से जारी इस अपडेट में कहा गया था कि कोरोना के बी.1.617.2 वेरिएंट से संक्रमण फैलने की बढ़ती दर और इस स्वरूप से कई देशों में बढ़ते संक्रमण के मामलों पर सख्त नजर रखी जा रही है। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि कोरोना वायरस के इस स्वरूप के असर पर अध्ययन करना डब्ल्यूएचओ के लिए उच्च प्राथमिकता है।

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