विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को कहा कि घातक कोरोनावायरस का आधिकारिक नाम ‘कोविड-19’ होगा। इस विषाणु की पहचान पहली बार 31 दिसंबर 2019 को चीन में हुई थी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख तेदरोस अदहानोम गेब्रेयसेस ने जिनेवा में संवाददाताओं से कहा कि अब हमारे पास बीमारी के लिए नाम है और यह ‘कोविड-19’ है। उन्होंने नाम की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘को’ का मतलब ‘कोरोना’, ‘वि’ का मतलब ‘वायरस’ और ‘डी’ का मतलब ‘डिसीज’ (बीमारी) है।
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख तेदरोस अदहानोम गेब्रेयसेस ने मंगलवार को कहा था कि इस वायरस के 99 प्रतिशत मामले चीन में है, लेकिन यह पूरे विश्व के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने सभी देशों से इस संबंध में किए गए किसी भी शोध की जानकारी साझा करने की अपील भी की थी।
चीन में घातक कोरोना वायरस से 97 और लोगों की जान जाने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,110 हो गई और इसके अभी तक 44,653, से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में 97 लोगों की जान चली गई और 2,015 नए मामलों की पुष्टि होने की खबरें हैं। आयोग ने बताया कि शनिवार को जिन 97 लोगों की जान गई उनमें से 94 हुबेई प्रांत के थे, जहां इस वायरस के कारण सर्वाधिक लोग मारे गए हैं। इसके अलावा हेनान, हुनान और चोंग्किंग में इससे एक-एक व्यक्ति की जान गई है।
फिच सॉल्यूशंस ने चीन में कोरोनावायरस के फैले संक्रमण के कारण 2020 में घरेलू वाहन विनिर्माण 8.3 प्रतिशत सिकुड़ जाने काअनुमान व्यक्त किया है। चीन में इस वायरस का संक्रमण के फैलने के कारण वाहनों के कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया है। फिच ने बुधवार को कहा कि यदि भारत में भी वायरस का संक्रमण फैला तो यहां भी इस तरह की नीतियां अपनाई जा सकती हैं।
फिच ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रणाली की स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत में वायरस का संक्रमण फैलने की रफ्तार चीन की तुलना में अधिक होगी और घरेलू वाहन उद्योग पर अधिक व्यापक असर देखने को मिलेगा। चीन भारतीय वाहन उद्योग के लिये कल-पुर्जों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में चीन में तैयार कल-पुर्जों की कमी होने से भारतीय वाहन उद्योग को उत्पादन की गति कम करने या बंद करने को बाध्य होना पड़ सकता है।