कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अमेरिका की एक प्रयोगशाला में बनी एंटीबॉडी का क्लिनिकल ट्रायल जल्द शुरू हो सकता है। साल 2019 के दिसबंर से लेकर अब तक कोरोना वायरस ने दुनियाभर में 1.25 करोड़ लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है और इस वायरस से लगभग 5,60,000 लोग मारे जा चुके हैं। दुनिया में लगभग 210 देश कोरोना की चपेट में हैं।
अमेरिका की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी रेजेनेरोन ने तीन चरण वाली प्रयोगयात्मक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल REGN-COV2 के ट्रायल की शुरुआत का एलान कर दिया है। अमेरिकी नेशनल इंटस्टीट्युट और एलर्जी एंड इंफिक्शियस डिसीज के साथ मिलकर इस हफ्ते से इस एंटीबॉडी का ट्रायल होगा।
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्रयोगशाला में बनाए गए प्रोटीन है जो प्राकृतिक एंटीबॉडी की तरह काम करते हैं और वायरस को पहचान कर उसे खत्म करने देते हैं। इस तरह की एंटीबॉडीस को विभिन्न बीमारी और शर्तों में इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कैंसर, अस्थमा और आमवात जैसी बीमारी शामिल हैं।
REGN-COV2 की दो एंटीबॉडी वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए बाध्य होती हैं। REGN-COV2 की मदद से कोविड-19 के अस्पताल में भर्ती और अस्पताल में ना भर्ती मरीजों पर ट्रायल किया जा रहा है। इस ट्रायल में 1,850 अस्पताल में भर्ती मरीज, 1,050 दवाघर वाले मरीज शामिल हैं। रेजेनेरोन का कहना है कि गर्मियों के बाद इस एंटीबॉडी का प्राथमिक डाटा आ सकता है।
रेजेनेरोन कंपनी की ओर से बनाई जाने वाली एंटीबॉडी चार अलग स्टडी पॉपुलेशन पर टेस्ट की जाएगी, जिसमें अस्पताल में भर्ती के कोविड-19 के मरीज, बीमारी के सामान्य लक्षण, संक्रमण के ज्यादा जोखिम वाले स्वस्थ व्यक्ति और कोरोना पॉजिटिव के क्लोज संपर्क में आने वाले स्वस्थ व्यक्ति शामिल होंगे।
अमेरिका की फार्मा कंपनी जाएंट इली लिली और कनाडा की कंपनी अबसेलेरा ने भी एक जून से अपने यहां बनी एंटीबॉडी का टेस्ट करना शुरू कर दिया है।
रेजेनेरोन की मोनोक्लोन एंटीबॉडी का ट्रायल अमेरिकी नेशनल इंटस्टीट्युट और एलर्जी एंड इंफिक्शियस डिसीज के हाल ही लॉन्च किए गए कोविड-19 प्रीवेंशन ट्रायल नेटवर्क का हिस्सा होगी, इसका काम कोविड-19 वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए वैक्सीन और इलाज का टेस्ट करना है।
इसके जरिए पहले से मौजूद चार क्लिनिकल ट्रायल को एक साथ लाया जाएगा जो एचआईवी/एड्स पर फोकस करता है। कोविड-19 प्रीवेंशन ट्रायल नेटवर्क एक क्रियात्मक यूनिट है, अमेरिका ने इस वक्त सबसे ज्यादा फोकस कोविड-19 के इलाज के लिए डायग्नोस्टिक, चिकित्सा शास्त्र और वैक्सीन को विकसित करने और उनकी जल्द डिलिवरी करने पर है।
मॉडर्ना की mRNA-1273 वैक्सीन जल्द ही तीसरे चरण के लिए टेस्ट की जा सकती है। यह वैक्सीन भी कोविड-19 प्रीवेंशन ट्रायल नेटवर्क के जरिए विकसित की गई है।