मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शंघाई और बीजिंग सहित अधिक आबादी वाले शहरों के अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं, जबकि अधिकारियों का दावा है कि पिछले महीने महामारी का प्रकोप चरम पर था।
चीन में कोविड महामारी की नई लहर को लेकर देश की कम्युनिस्ट सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की त्रुटिपूर्ण रोकथाम नीतियों और अप्रभावी घरेलू वैक्सीन के कारण चीन कोविड महामारी के रूप में बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।
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रिपोर्ट के अनुसार, शंघाई और बीजिंग सहित अधिक आबादी वाले शहरों के अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं, जबकि अधिकारियों का दावा है कि पिछले महीने महामारी का प्रकोप चरम पर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सरकार ने बिना किसी योजना के अपनी जीरो-कोविड नीति को खत्म कर दिया था। जबकि कोविड के शुरुआती चरण में सख्त कदम उठाए थे।
वायरस के प्रसार को रोकने के लिए, चीन ने सख्त लॉकडाउन और कड़े क्वारंटाइन नियम लागू किया था और इस दौरान अधिकारियों द्वारा अमानवीय व्यवहार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीपी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण चीन की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट दर्ज की गई। चीनी सरकार द्वारा घोषित उपायों से मौतों को रोका जा सकता था। हालांकि, उन्होंने अपनी आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोविड के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरक्षा के बिना छोड़ दिया, क्योंकि चीन के स्वदेशी कोविड टीके वायरस के खिलाफ अप्रभावी साबित हुए और लोगों की रक्षा करने में भी विफल रहे।
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चीन में निर्मित कोविड टीके अप्रभावी साबित हुए
रिपोर्ट में कहा गया कि चीन की कोविड-19 रोकथाम नीति ने चीनी लोगों को प्रभावित किया है, जिसमें देश में लोगों के बीच बड़ा असंतोष पैदा हुआ है। कोविड नीति खत्म करना और अप्रभावी चीनी टीकों के कारण देश में तबाही मची। चीन में निर्मित टीके कोविड-19 के खिलाफ अप्रभावी साबित हुए हैं। वहीं, महामारी के शुरुआती चरणों में चीनी अधिकारियों ने मॉडर्ना और फाइजर सहित निर्माताओं से विकसित टीकों को खारिज कर दिया था।