stranded Nepalese migrant workers at Indo-Nepal border
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और आसपास के इलाकों में काम करने वाले तीन सौ से ज्यादा नेपाली मजदूर धारचुला में नेपाल की सीमा पर जमा हैं, लेकिन नेपाल सरकार उनके लिए अपने देश की सीमा नहीं खोल रही। ये मजदूर पिछले चार दिनों से यहां जमा हैं और जगह-जगह से दो-तीन दिनों तक पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं।
कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से जुड़ने वाली अपनी सभी सीमाएं सील कर रखी हैं। महाकाली नदी के किनारे जमा ये सैकड़ों नेपाली मजदूर अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने घर जाने के लिए सीमा खोलने की मांग कर रहे हैं।
नेपाल ने 27 मार्च को महज तीन घंटे के लिए सीमा खोली थी, जिससे 225 नेपाली वापस जा सके थे। उसके बाद से यहां जमा होने वाले नेपाली मजदूरों की संख्या तो बढ़ती जा रही है, लेकिन सीमा न खुलने की वजह से वो अपने देश नहीं जा पा रहे।
भारतीय सीमा सुरक्षा बल का कहना है कि भारत ने अपनी तरफ से उन्हें जाने की इजाजत दे रखी है, लेकिन नेपाल की तरफ से काली नदी के पुल को नहीं खोला जा रहा है ताकि ये लोग वहां जा सकें।
धारचुला में फंसे एक नेपाली नागरिक दिलेन्द्र महाता के मुताबिक पिछले तीन दिनों से यहां जमा लोग खाने पीने का कोई सामान खरीद नहीं पा रहे हैं, लेकिन सीमा सुरक्षा बल के जवान और चैंबर ऑफ कॉमर्स के लोग उन्हें खाना उपलब्ध करा रहे हैं।
दूसरी तरफ धारचुला के मुख्य जिला अधिकारी यजुनाथ पौडेल का दावा है कि इन स्थानीय लोगों को वापस लाने की कोशिशें और इनकी मेडिकल जांच के बाद इन्हें क्वारंटीन में भेजने की तैयारियां की जा रही हैं और सारी तैयारियां पूरी होने के बाद उन्हें वापस नेपाल में प्रवेश देने का फैसला लिया जाएगा।