दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के देश इस समय अपनी अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहन के लिए लगातार राहत पैकेज की घोषणा कर रहे हैं। कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां ठप हैं और लोग अपने घरों में बंद हैं।
ऐसे में दक्षेस देश निवेश को प्रोत्साहन, निजी कंपनियों को राहत और आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए राहत पैकेज देने में जुटे हैं। विश्वबैंक ने हाल में आगाह किया है कि इस जानलेवा महामारी की वजह से दक्षिण एशिया का आर्थिक प्रदर्शन पिछले 40 साल के सबसे निचले स्तर पर आ सकता है। हालांकि, कोविड-19 की मार दुनियाभर को झेलनी पड़ रही है।
विश्वबैंक ने सरकारों को सलाह दी है कि वे इस स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के उपायों में तेजी लाएं, अपने लोगों, विशेषरूप से गरीबों का बचाव करें और अर्थव्यवस्था की हालत को तेजी से सुधारने के लिए कदम उठाएं।
आठ सदस्य देशों के दक्षेस समूह में भारत 2,900 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत ने इस महामारी के मद्देनजर 1.7 लाख करोड़ रुपये (22.6 अरब डॉलर) का राहत पैकेज दिया है। भारत ने लॉकडाउन की वजह से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें गरीब वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को प्रत्यक्ष नकदी अंतरण, मुफ्त अनाज और रसोई गैस सिलेंडर का वितरण इत्यादि शामिल है।
इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती की है। साथ ही बाजार को एक लाख करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराई है। तीन माह तक ऋण का भुगतान नहीं करने की भी सुविधा दी गई है। साथ ही सरकार ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता को छह से 12 माह तक स्थगित करने की घोषणा की है, जिससे कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले महीने लॉकडाउन की घोषणा की थी। उस समय निजी क्षेत्र की ओर से हालांकि इसका मामूली विरोध किया गया था। लेकिन बंद लंबा खिंचने के साथ पाकिस्तान में कंपनियों और दुकानदारों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका मानना है कि बंद लंबा खिंचने से उनके लिए टिके रह पाना संभव नहीं होगा।