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अगस्त में ही चीन को अपनी चपेट में ले चुका था कोरोना का संक्रमणः हार्वर्ड रिसर्च

Tue, 09 Jun 2020 10:51 PM IST
Rohit Ojha वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस के संक्रमण ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके फैलने को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में  हावर्ड मेडिकल स्कूल ने एक खुलासा किया है। इस खुलासे में चीन द्वारा इस वायरस को लेकर बरती गई लापारवाही और साजिशों का पर्दाफाश किया गया है।

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हार्वर्ड के एक अध्ययन में कहा गया है कि वुहान में कोरोना वायरस अगस्त 2019 में ही आ गया था। वुहान के अस्पतालों के बाहर लगने वाले ट्रैफिक के बढ़ने से इस स्टडी में यह नतीजा निकाला गया है। दूसरी ओर चीन ने मंगलवार को इस स्टडी को बकवास बताया है।

हार्वर्ड की स्टडी में दावा किया गया है कि सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चलता है कि वुहान के पांच अस्पतालों में अगस्त से दिसंबर के बीच भारी भीड़ थी। इसके साथ ही ऑनलाइन सर्च में 'खांसी' और 'डायरिया' के बारे में भी ज्यादा सर्च किया जा रहा था। हार्वर्ड के अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉ. जॉन ब्राउनस्टीन का कहना है कि जाहिर तौर पर, जिसे कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत माना जाता है, उस वक्त से बहुत पहले सामाजिक तौर पर हलचल होने लगी थी।
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रिसर्चर्स ने सैटेलाइट डेटा में 2018 और 2019 के बीच तुलना की। एक मामले में पाया कि वुहान के सबसे बड़े अस्पताल तिआन्यू में अक्तूबर 2018 में 171 कारें पार्क थीं, जबकि उसकी जगह अगले साल 2019 में 285 गाड़ियां पार्क की गई थीं। हालांकि, डॉ. ब्राउनस्टीन का कहना है कि पूरी तरह सच जानने के लिए और स्टडी करने की जरूरत है।

हार्वर्ड के इस अध्ययन के बारे में जब चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह बकवास है। ट्रैफिक वॉल्यूम जैसी सतही निगरानी के सहारे ऐसा नतीजा निकालना एक दम बकवास है। माना जा रहा है कि नवंबर में वायरस सबसे पहले चीन में पाया गया था।

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