दुनियाभर के लोग कोरोना वायरस संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर नियंत्रण के उपाय ढूंढ रहे हैं। इसी बीच हांग कांग में आए एक नए मामले ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। हांग कांग में अप्रैल के महीने में कोरोना से ठीक हो चुका एक व्यक्ति फिर से संक्रमित पाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई महीनों के बाद फिर से संक्रमित होने का यह पहला मामला सामने आया है।
33 साल के इस व्यक्ति को ठीक हो जाने के साढ़े चार महीने बाद दोबारा कोरोना संक्रमण हो गया। उसे अप्रैल में जांच में कोविड-19 नेगेटिव होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन 15 अगस्त को जब वो स्पेन से ब्रिटेन के रास्ते वापस हांगकांग लौटा तो एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग से पता चला कि वो फिर संक्रमित हो गया है। हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में लिखा कि दोबारा संक्रमित पाए जाने से पहले वह व्यक्ति स्वस्थ भी लग रहा था। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मेडिकल पत्रिका 'क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज ' में प्रकाशित हुई है।
इम्युनिटी विकसित होने के बाद भी कोरोना फैलने का खतरा
अध्ययन के मुख्य लेखक क्वोक-युंग यूएन और उनके सहयोगियों ने कहा कि 'हमारे नतीजों में पता चला कि SARS-CoV-2 इंसानों में बना रह सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा, 'भले ही मरीजों ने संक्रमण के खिलाफ इम्युनिटी विकसित कर ली हो, फिर भी वो कोरोना वायरस को दूसरों में फैला सकते हैं।' जबकि कुछ मरीज लक्षण खत्म होने के बावजूद कई हफ्तों तक वायरस से संक्रमित रहते हैं। शोधकर्ता अब तक इस बात को नहीं समझ पाए हैं कि क्या इस तरह के मामलों में पुराना संक्रमण फिर से हो रहा है, नया संक्रमण हो रहा है या फिर संक्रमण का पता देरी से चल रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा, 'कोविड-19 से ठीक होने के बाद दोबारा संक्रमित होने वाले व्यक्ति का यह दुनिया का पहला केस है।'
दोनों बार अलग-अलग किस्म के कोरोना से हुआ संक्रमण
शोध में पाया गया कि व्यक्ति जब दोबारा संक्रमित हुआ तो उसके शरीर में पहले संक्रमण के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस की किस्म से अलग एक दूसरी किस्म पाई गई। दूसरी बार संक्रमित होने पर उसके शरीर में संक्रमण के कोई लक्षण भी नहीं थे।
दोबारा संक्रमित पाया गया व्यक्ति यूरोप से हांग कांग आया था। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जीनोमिक सीक्वेंस के जरिए पता लगाया कि ये व्यक्ति दो अलग-अलग स्ट्रेन से संक्रमित हुआ है।
शोधकर्ताओं की टीम के सदस्य डॉक्टर काई-वांग तो ने बताया कि, "इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि टीका लगवाना व्यर्थ होगा। टीका लगवाने से जो इम्युनिटी मिलती है वो प्राकृतिक संक्रमण से मिली इम्युनिटी से अलग हो सकती है। टीके कितने असरदार हैं ये देखने के लिए हमें टीकों के ट्रायल के नतीजों का इंतजार करना होगा।"
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने बताया कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं। केरखोव का कहना है कि जिन मरीजों में हल्का भी लक्षण है, उनमें संक्रमण के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स आ जाता है, लेकिन ये अब तक पता नहीं चल सका है कि ये इम्यून रिस्पॉन्स कितना मजबूत है और कितनी दिनों तक शरीर में रहता है। केरखोव ने सोमवार को कहा कि हांगकांग वाले मामले को लेकर जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान इस तरह के मामलों को समझने की कोशिश की जाती है कि मरीज में किस तरह का संक्रमण हुआ है और ठीक हुए मरीज की न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी कैसी है।
चीन में भी आया था दोबारा संक्रमण का मामला
इसके पहले चीन में लोगों के अस्पताल से छोड़े जाने के बाद दोबारा संक्रमित हो जाने के मामले सामने आए थे, लेकिन उन मामलों में यह साफ नहीं हुआ था कि कि उन लोगों को दोबारा संक्रमण पहले संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद हुआ था, या उनके शरीर में पहले संक्रमण का वायरस मौजूद था।