चीन में शुक्रवार से ‘चंद्र नव वर्ष’ त्यौहार शुरू हो रहा है, और इनकी छुट्टियां चल रही हैं। इस दौरान देश भर से करोड़ों लोग अपने घर व सैर-सपाटे वाली जगहों पर आते-जाते हैं। नई रोक से वे भी प्रभावित होंगे।
वुहान के पर्यटन अधिकारियों ने सभी क्षेत्रीय एजेंसियों को 22 जनवरी से आठ फरवरी तक सभी तरह के पर्यटन पर रोक लगाने के लिए कहा है। विदेशों से आ रहे सभी ग्रुप टूर भी 30 जनवरी तक रद कर दिए गए हैं, पैसा लौटाने को कहा गया है। पांच सितारा होटलों को चेताया गया है कि वे आठ फरवरी तक अपने सभी आयोजन रद कर दें।
हांगकांग से लेकर यूएस तक में मिले मामले
इस बीच कई अन्य देशों में भी कोरोनावायरस मिलने की पुष्टि हुई है। थाईलैंड में चार, और अमेरिका, ताइवान, जापान, कोरिया गणराज्य में एक-एक केस मिले हैं। हांगकांग और मकाओ में भी कई मरीज मिले हैं।
चीन में हालात से हांगकांग और शंघाई स्टॉक मार्केट करीब 1.5 प्रतिशत गिर गया। वहीं चीन की मुद्रा युआन में भी दो हफ्ते की सर्वाधिक गिरावट आई है। वहीं त्यौहारी समय में रिलीज होने जा रही सात फिल्में भी चीन में टाल दी गई हैं।
सैकड़ों उड़ानें रद
वुहान मध्य चीन में उद्योग और वाणिज्य का केंद्र माना जाता है। यहां से बृहस्पतिवार को 566 उड़ानें जानी थीं। सुबह 11:30 बजे चीन के नागरिक उड्डयन प्रशासन (सीएएसी) के उड़ानों पर रोक के आदेश आने के बाद इनमें से 288 को रद कर दिया गया है। रोजाना औसतन 30 हजार यात्री इन विमानों से बाहर जाते हैं, वे सभी यहां फंस गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक हैं।
अभी कोई वैक्सीन नहीं
फिलहाल इस वायरस को रोकने के लिए कोई टीका नहीं है। इसके लक्षणों में बुखार, सांस लेने में तकलीफ और खांसी दर्ज किए गए हैं। कई लोगों को सांस की गई परेशानियां भी आ रही हैं।
हालात : अचानक आदेशों से लोगों में गुस्सा
इन तीनों शहरों को छोड़ने पर लगी रोक के बाद ये एक तरह की जेल में बदल गए हैं। लोगों को घर से भी तभी निकलने के लिए कहा गया है, जब ऐसा करना बहुत जरूरी हो। इन शहरों में घरों से निकले लोग मास्क में नजर आ रहे हैं। वहीं खांसते और छींकते भी कई लोग नजर आ रहे हैं, जिनकी वजह से भय का माहौल है। ऐसे लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया जा रहा है।
अधिकतर लोगों में चीनी प्रशासन के लिए गुस्सा है क्योंकि शहरों में रोक के आदेश लागू होने से केवल एक घंटे पहले अचानक जारी किए गए। इसकी वजह से उलझनें बढ़ीं और भय का माहौल है। सामान्य छींक आने पर भी लोग जांच के लिए अस्पतालों की ओर दौड़ रहे हैं।
वुहान शहर में करीब 700 भारतीय रहते हैं जिनमें से अधिकतर छात्र हैं। स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें बुधवार को ही शहर में और शहर से बाहर यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। भारत इस मामले में पहले ही यात्रा परामर्श जारी कर चुका है। भारतीय दूतावास लगातार इन भारतीयों के संपर्क में है।
हवाईअड्डों, ट्रेनों व बस अड्डों पर जांच, नई जगहों पर मामले मिले
24 जनवरी से नया वर्ष के लिए आवागमन कर रहे करोड़ों लोगों को देखते हुए चीन में कई हवाई अड्डों, बस अड्डों व ट्रेनों में जांच शुरू कर दी गई है। इसके चलते बीजिंग, शंघाई और चोंगकिंग और उत्तर पूर्व, मध्य और दक्षिण चीन से भी कोरोना वायरस के मामले सामने आ रहे हैं।
भारत सतर्क, दुनिया भर में जांच
- भारत में मंगलवार तक सात हवाईअड्डों पर 43 उड़ानों में सवार कुल 12,828 यात्रियों की अत्याधुनिक थर्मल इमेजिंग कैमरे से विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। कोई संक्रमित नहीं।
- तुर्की में हवाईअड्डों पर विदेश, खासकर चीन से आए यात्रियों की थर्मल कैमरों से जांच की जा रही है। संक्रमित मरीजों के लिए विशेष एंबुलेंस और चिकित्सा केंद्र बनाए गए हैं।
- उत्तर कोरिया ने विदेशी पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में भी स्वास्थ्य विभाग ने सभी हवाईअड्डों पर व्यापक जांच शुरू की है।
इन तीन शहरों में लॉक डाउन
| शहर |
आबादी |
| वुहान |
1.15 करोड़ |
| हुआंग्गांग |
75 लाख |
| इजोऊ |
11 लाख |
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार-बृहस्पतिवार की दरम्यिानी रात आपात वार्ता बुलाई, जिसमें पब्लिक हेल्थ इमर्जेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (फीक) लागू करने पर निर्णय लिया जाना था। बंद दरवाजे में हुई इस बैठक के बाद डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेडरॉस अधानोम ने कहा कि फीक पर निर्णय से पहले अभी और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। आगे और बैठक की जाएगी।
उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बताया और कहा कि फीक घोषणा के गंभीर परिणाम होते हैं, जैसा स्वाइन फ्लू या इबोला के समय हुआ था। लेकिन फ्रांस की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी व आपात समिति बैठक में शामिल डीडियर होसिन ने कहा कि फीक लागू करने पर बैठक में मतभेद थे। ऐसा करने के लिए फिलहाल मृत्यु दर कम है, पूर्व में हुई ऐसी घोषणाओं में कहीं अधिक मौतें हुई थीं।
अभी इस निर्णय के लिए इंतजार किया जाएगा कि कोरोनावायरस के मौजूदा प्रसार को मानव जाति के लिए खतरा माने या नहीं। फीक ऐसी बीमारी के फैलने पर लगाया जाता है, जिसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की जरूरत हो।
सांप या चमगादड़ से आया वायरस
चीन में 17 लोगों को मारने वाले कोरोना वायरस फैलने के पीछे सांप या चमगादड़ हो सकते हैं। यह दावा वायरस के जनेटिक विश्लेषण के आधार पर दो अलग अलग शोध में किया गया है। इन शोध में वायरस के जीनोम सीक्वेंस का अध्ययन हुआ है।
जर्नल चाइना लाइफ साइंस में मंगलवार को प्रकाशित शोध के अनुसार वुहान में मिले कोरोना वायरस जेनेटिक रूप चमगादड़ों में मिलने वाले कोरोनावायरस से मिलता जुलता है। वुहान के चमगादड़ों में ‘वुहान सीओवी’ (कोरोनावायरस) आमतौर पर पाया जाता है।
ऐसे में वहीं से इसके आने की बात मानने की वजह वैज्ञानिकों के पास है। साथ ही वैज्ञानिकों का आकलन है कि चमगादड़ों से मानव तक पहुंचने के दौरान बीच में भी यह कुछ जीवों होकर गुजरा है।
दूसरा अध्ययन बुधवार को मेडिकल वायरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया, जिसमें सांपों को संभावित दोषी बताया गया। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार उन्होंने विस्तृत जीन सीक्वेंसिंग और तुलना के बाद पाया कि यह सांपों से आया है। यह सांप संभवत: जंगल से लाए गए थे। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई गई है।
जंगली जीवों के मांस भक्षण पर संदेह
हालांकि इन अध्ययनों ने यह नहीं बताया है कि इन जीवों से मानव में यह वायरस कैसे पहुंचा, लेकिन संकेत दिया है कि चीन के वुहान में खाद्य वस्तुओं की मंडी में कई प्रकार के जीवों की भी खरीद-फरोख्त होती है। इनमें जीवित लोमड़ी, मगरमच्छ, भेड़ियों के बच्चे, छिपकलियां, सांप, चूहे, चमगादड़, मोर, साही शमिल होते हैं।
चीन के रोग नियंत्रण व रोकथाम केंद्र के निदेशक गाओ फू ने बीजिंग में दावा किया कि फिलहाल चीनी अधिकारी मान रहे हैं कि यह वायरस जंगल के जीवों से मानवों में आया। इससे पहले सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रम (सार्स) सीविट (मुश्क-बिलाव) का मांस खाने से फैलने की आशंका जताई गई थी।