चीन के वुहान शहर से पिछले साल कोरोना वायरस का प्रसार शुरू हुआ। जब इसने अपना प्रसार चीन से बाहर फैलाया तब तक चीन में इसके संक्रमण से तीन हजार लोगों की मौत हो चुकी थी और 80 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके थे।
वर्तमान समय में इस जानलेवा वायरस से दुनियाभर में 12 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित है और 60 हजार लोग इस वायरस की चपेट में आकर मौत की नींद सो चुके है। इटली, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देश भी इस वायरस की मार झेल रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे वैश्विक निकायों ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए दक्षिण कोरिया द्वारा अपनाई गई रणनीति को लेकर उसकी सराहना की। वही एक और प्रशासन जिसने अपने क्षेत्र के भीतर संकट को कम करने के लिए प्रशंसनीय कार्य किया है वह है ताइवान।
ताइवान चीन के बेहद ही करीब स्थित है। चीन से ताइवान की दूरी महज 81 मील है। लेकिन ताइवान ने सटीक रणनीति अपनाते हुए इस वायरस को अपने यहां फैलने से रोका है। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस के प्रसार की खबर फैली, ताइवान का राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमान केंद्र (एनएचसीसी) ने इसे लेकर तेजी से कार्रवाई की। स्टैनफोर्ड मेडिसिन में बाल रोग के प्रोफेसर और विशेषज्ञ जेसन वांग का कहना है कि यह परिणाम नई तकनीक और 2003 के सार्स प्रकोप को देखते उठाया गए कदम का नतीजा है।
ताइवान का राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमान केंद्र (एनएचसीसी) को सार्स महामारी के बाद बनाया गया और यह देश के लिए किसी भी बड़ी महामारी से लड़ने के लिए एक हथियार के रूप में काम करता है। जहां दुनियाभर के बड़े देश और अर्थव्यवस्था यह सोचने में व्यस्त है कि कौन सा कदम उठाया जाए। ताइवान कोरोना से लड़ने के लिए रणनीति बना चुका था। चीन के निकट के होने के चलते ताइवान पर इस वायरस के खतरे का सबसे ज्यादा संभावना थी।