अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ मेडिसिन के फार्मोकोलॉजी विभाग के भारतीय मूल के प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉ राजेश खन्ना का दावा है कि कोरना शरीर में अपना जाल बिछाने तक व्यक्ति को दर्द महसूस नहीं होने देता है। इसी कारण संक्रमण के तीन-चार दिन बाद जब मरीज के शरीर में वायरस फैल चुका होता है तब उसे शरीर या मांसपेशी में दर्द महसूस होता है। उन्होंने 100 चूहों पर हुए अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है।
स्पाइक प्रोटीन रोकता है दर्द के संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार, वैस्कुलर इंडोलिथियल ग्रोथ फैक्टर नामक प्रोटीन न्यूरोपिलीन-1 रिसेप्टर को जकड़ लेता है। इससे हुई प्रतिक्रिया में न्यूरॉन सक्रिय हो जाते हैं। इनके सक्रिय होते ही व्यक्ति दर्द महसूस करने लगता है। संक्रमण में वायरस इसी रिसेप्टन न्यूरोपॉलिन-1 को जकड़ लेता है और वायरस की ऊपरी सतह पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन दर्द महसूस कराने वाले संकेत रोक देता है।
...और आप बेफिक्र होकर घूमते रहते हैं
प्रोफेसर खन्ना के अनुसार, संक्रमित होने के बाद व्यक्ति को शुरुआत में दर्द महसूस नहीं होता है। वह बेफिक्र होकर घूमता रहता है। इसी कारण से वायरस तेजी से फैल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस के इस रूप को समय रहते पहचानना बहुत मुश्किल है।
भारतीय इंजीनियर ने बनाया स्पर्श रहित सैनिटाइजर कम थर्मामीटर
भारतीय इंजीनियर रोहन अग्रवाल द्वारा बनाई एक मशीन सैनिटाइजर के साथ ही थर्मामीटर का काम करेगी। ऑटोमेटिक मशीन को छूने की जरूरत भी नहीं है। पूरी तरह से विदेशी मशीन में लगने वाली सभी कलपुर्जे भारत में ही बने हैं। महज 2 वर्ष पहले दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़कर निकले रोहन अग्रवाल की इस मशीन की कीमत महज 4 हजार रुपये है। पिछले 1 महीने के दौरान देश-विदेश से मशीन के पांच हजार से अधिक ऑर्डर मिल चुके हैं।