डॉ. एमा हेहर्स्ट का कहना है कि जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा। एंटीबॉडीज टेस्ट की बजाए अब स्वास्थ्यकर्मियों के नाक के स्वैब की जांच आसानी से हो सकेगी और समय रहते वायरस की पहचान भी हो सकेगी। किट का ट्रायल चल रहा है और उम्मीद है कि पूरी दुनिया के लिए ये किट इस महामारी में वरदान होगी।
एमएमआर के टीके से इलाज पर मंथन
बीसीजी के टीके के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के वैज्ञानिक एमएमआर के टीके से कोरोना के इलाज पर मंथन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का तर्क हे कि नौ माह के बाद के बच्चे को एमएमआर (मम्प्स, मीजल्स और रूबेला) वायरस से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है। यही कारण है कि छोटे बच्चों को वायरस अधिक प्रभावित नहीं कर पा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि एमएमआर वायरस में जो प्रोटीन होते हैं उसी से मिलते-जुलते प्रोटीन कोविड-19 में हैं।