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टीबी की दवा से कोरोना को हराने के लिए इसी सप्ताह चालू होगा इंसानी परीक्षण

Mon, 04 May 2020 03:59 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, ह्यूस्टन। 
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कोरोना वायरस दवा (सांकेतिक) - फोटो : social media
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कोरोना वायरस महामारी के इलाज के लिए टीबी वैक्सीन से उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। अमेरिका की टैक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने करीब 1800 अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को इस वैक्सीन के कोरोना वायरस पर प्रभाव की जांच के चौथे और आखिरी चरण यानी इंसानी परीक्षण के लिए स्वयंसेवक के तौर पर बुलाया है।

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यह परीक्षण आगामी सप्ताह में चालू हो जाएगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि बीसीजी (बैसिल्यूस कैलमैट-गुअेरिन) के टीके की मदद से इम्यून सिस्टम को बढ़ाकर कोरोना वायरस संक्रणम के दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है। टैक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी चिकित्सकीय परीक्षण में इंसानों पर जांच के लिए संघीय इजाजत हासिल करने वाला पहला अमेरिकी संस्थान है।

शोधकर्ताओं को यह साबित करने की उम्मीद है कि बीसीजी से कोरोना वायरस के प्रभाव में कमी आती है। इससे कोरोना संक्रमण के कारण बहुत कम लोगों के अस्पतालों में भर्ती होने या मरने की संभावना बचती है।
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छह महीने में पूरी दुनिया में हो सकती है उपलब्ध
यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा, शोधकर्ता ब्लैडर कैंसर के इलाज में भी काम आने वाली इस वैक्सीन को दोबारा उपयोग करने की मांग कर रहे हैं। बीसीजी को कोरोना वायरस के खिलाफ उपयोग करने के लिए महज छह महीने में सभी जगह उपलब्ध कराया जा सकता है, क्योंकि यह पहले ही कई अन्य बीमारियों के इलाज में उपयोग के लिए सुरक्षित साबित हो चुकी है।

यूनिवर्सिटी के हेल्थ साइंस सेंटर के प्रोफेसर ऑफ माइक्रोबायल पैथोजेनेसिस एंड इम्यूनोलॉजी डॉ. जेफ्रे डी सिरिलो के मुताबिक, इससे अगले 2-3 साल में खासतौर पर कोरोना वायरस का ही इलाज करने वाली वैक्सीन तैयार होने तक बेहद अंतर पैदा किया जा सकता है।

डॉ. सिरिलो के मुताबिक, बीसीजी से कोरोना वायरस संक्रमण को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन कोरोना की वैक्सीन तैयार होने तक यह उसकी कमी के अंतर को थोड़ा भर सकता है, ताकि हमें वैक्सीन विकसित करने के लिए थोड़ा और समय मिल जाए।

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