अमेरिका की पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिसकी मदद से मरीजों के खून में मौजूद ऑक्सीजन को आसानी से निकाला जा सकता है। यह डिवाइस मरीज के लिए फेफड़े का काम करेगी जैसे डायलिसिस की मशीन किडनी का काम करती है।
यूनिवर्सिटी के स्वॉनसन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के बायो इंजीनियर प्रो. विलियम फेडरस्पील का कहना है कि हेमोलंग मशीन से खून में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को आसानी से निकाला जा सकता है। वे बताते हैं कि वेंटिलेटर से फेफड़ों को अधिक नुकसान हो रहा है। इस मशीन के चलते मरीज को बेहोश नहीं करना पड़ेगा।
मशीन को एफडीए की मंजूरी
एफडीए ने आपातकाल में इसके इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गंभीर कोरोना रोगियों को बचाया जा सकेगा।
सीओपीडी मरीजों के लिए बनी
सीओपीडी और श्वास के गंभीर रोगियों के लिए यह मशीन बनाई गई थी। यूरोप में इस मशीन को अनुमति 2013 में मिल गई थी जबकि अमेरिका में अभी इसका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।