वैज्ञानिकों ने पाया कि सूखी हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म विषाणु पर गुरुत्वाकर्षण का असर तुरंत नहीं होता। वैसे ही जैसे कुछ दूरी पर खोली गई इत्र की बोतल से निकली खुशबू हवा के जरिए आप तक पहुंचती है, यह भी पहुंच सकते हैं।
हवा में बूंदों से बने एयरोसोल के जरिए संक्रमण संभव है। यहां से सांस लेने, बातचीत, छींकने और खांसने के दौरान निकले द्रव के वायरस से संक्रमण हो सकता है। इसमें वायरस, फंगस और बैक्टीरिया हो सकते हैं। सूक्ष्म कणों के हवा के साथ बहाव को भौतिक विज्ञान में ब्राउनियन मोशन कहते हैं।
हवा गर्म से ठंडे भाग की ओर जाती है तो एयरोसोल और वायरस भी उसके साथ चलते हैं। छींक या खांसी से निकलीं बूंदें कमरे के दूसरे हिस्से में पहुंच सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ मीटर फासला रख कर संक्रमित के वायरस से बचा नहीं जा सकता। मॉल, रिटेल स्टोर, ऑफिस और मीटिंग रूम में इनके जरिए संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
रिपोर्ट में राहत जताई गई कि अभी तक उन अस्पतालों से हवा से वायरस फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है जहां कोविड-19 के मरीज रखे गए हैं।