कोरोना वायरस का कहर यूरोपीय देशों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इटली, स्पेन समेत अधिकतर देशों में हजारों की संख्या में लोगों की जानें जा चुकी हैं। अन्य देशों की तरह यूरोप में भी यह वायरस बुजुर्गों के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हुए है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक यूरोप में जान गंवाने वाले 95 फीसदी से ज्यादा लोगों की उम्र 60 साल से ज्यादा थी। हालांकि डब्ल्यूएचओ के यूरोप प्रमुख डॉक्टर हांस क्लुगे ने यह भी चेताया है कि इस बीमारी में सिर्फ बढ़ती उम्र ही एकमात्र जोखिम नहीं है।
युवा भी सुरक्षित नहीं
डॉक्टर क्लुगे ने कहा कि ये धारणा तथ्यात्मक रूप से गलत है कि कोविड-19 केवल बुजुर्ग लोगों पर प्रभाव डालता है। युवा लोग भी इससे अपराजित नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य संस्था का कहना है कि 50 से कम आयु वर्ग के लोगों में मध्यम या गंभीर संक्रमण होता है। डॉक्टर क्लुगे ने कहा कि किशोरों और 20 वर्ष के आसपास की आयु वाले लोगों में भी गंभीर संक्रमण देखा गया। इनमें से कई को गहन चिकित्सा की जरूरत पड़ी जबकि दुर्भाग्य से कुछ की मौत हो गई।
यूरोप में अब तक 30 हजार से ज्यादा मौत
डब्ल्यूएचओ के यूरोप प्रमुख ने बताया कि ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यूरोप में अब तक 30,098 लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकतर इटली, फ्रांस और स्पेन के थे। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि इन मौतों में से 95 प्रतिशत लोग 60 से अधिक आयु वर्ग के थे जबकि इनमें से आधे लोगों की उम्र 80 वर्ष से अधिक थी।
अन्य बीमारियों ने बढ़ाई मुश्किलें
उन्होंने कहा कि मरने वाले पांच में से चार लोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों में से किसी एक से पहले ही पीड़ित थे। क्लुगे ने कहा कि अच्छी खबर है यह है कि ऐसी सूचनाएं हैं कि अस्पताल में भर्ती 100 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग कोविड-19 से ठीक हुए हैं।