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कोरोनासोम्निया : महामारी ने की दुनिया के 60% लोगों की नींद गायब

Sun, 13 Jun 2021 06:53 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

हजारों वयस्कों पर एक सर्वे किया तो सामने आया कि केवल 20% ही खराब नींद से गुजर रहे थे। लेकिन, इसके 10 माह बाद इस साल जब दोबारा यह सर्वे हुआ तो महामारी के कारण खराब नींद से गुजर रहे लोगों की तादाद बढ़कर 60% हो गई
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सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : social media
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विस्तार
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अगर बिस्तर पर लेटते ही इन दिनों आपके दिमाग में खलबली मचने लगती है और ठीक ढंग से नींद नहीं आती तो ऐसा महसूस करने वाले आप अकेले नहीं हैं। महामारी काल में दुनियाभर में तनाव और घबराहट ने बड़ी तादाद में लोगों की नींद गायब कर दी है। जानकारों का मानना है, इस वक्त हम 'कोरोनासोम्निया' से गुजर रहे हैं , जिसमें हमारी नींद लगातार बिगड़ती जा रही है।

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 41 % वयस्कों ने कहा, उन्हें ज्यादा घबराहट रहती है
बीते साल अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन ने जब हजारों वयस्कों पर एक सर्वे किया तो सामने आया कि केवल 20% ही खराब नींद से गुजर रहे थे। लेकिन, इसके 10 माह बाद इस साल जब दोबारा यह सर्वे हुआ तो महामारी के कारण खराब नींद से गुजर रहे लोगों की तादाद बढ़कर 60% हो गई। 

इनमें से आधे लोगों ने माना कि उनकी नींद की गुणवत्ता काफी बिगड़ गई है। फिलहाल संक्रमण भले ही कम हो रहा हो , लेकिन 41 % वयस्कों ने कहा, उन्हें कोरोनाकाल की शुरुआत के मुकाबले इन दिनों ज्यादा घबराहट रहती है ।
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निद्रा विशेषज्ञों ने बताए अच्छी नींद लेने के उपाय 
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका एक सबसे प्रभावी उपचार कॉग्निटिव बिहेवियर थेरैपी (सीबीटी) है । इसके जरिये आपकी नींद को बिगाड़ रहे खयाल, चिंता, भावना और व्यवहार को नियंत्रित किया जाता है। यहां पेश सीबीटी प्रेरित कुछ तरीके अपनाकर आप नींद में सुधार ला सकते हैं.... 

25 मिनट का नियम सोने और जागने का नियम
जब भी रात में सोने जाएं और 25 मिनट तक नींद न आए या नींद टूटने के बाद दोबारा नहीं सो पाएं तो बिस्तर से उठ जाएं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में न्यूरोसाइंस विशेषज्ञ डॉ. मैथ्यू वॉल्कर के मुताबिक फौरन खड़े होकर कोई न कोई गतिविधि करने लगें, जो आपके दिमाग को शांत करें और थकाऊ लगे। 

  • भले आप स्ट्रेचिंग, ध्यान, प्राणायाम से लेकर, संगीत सुनने या किताब पढ़ने जैसा कोई भी काम करें। जब आपको थोड़ी थकान महसूस हो, तो बिस्तर पर जाएं। 


फेंक दें तमाम चिंताएं
अगर आप ज्यादा चिंतामग्न रहते हैं तो सोने से पहले एक कागज-कलम लेकर बैठें। अगली सुबह आप क्या करने वाले हैं , किससे बातचीत करेंगे, कहां-कहां जाएंगे या कौनसी बात आपको सता रही है। यह सब लिखकर थोड़ी देर बाद उस कागज को मोड़कर फेंक दें। स्लीप मेडिसिन डॉक्टर इलीन एम रोसेन का कहना है, इससे आपको उन चिंताओं से मुक्ति में मदद मिलेगी।

शयनकक्ष में स्क्रीन न देखें 

  •  हमारा अधिकांश वक्त स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर बीत रहा है। हम बिस्तर पर लेटने के बाद भी इनका इस्तेमाल जारी रखते हैं। सोते समय इनसे निकलने वाली नीली रोशनी आंखों और मस्तिष्क के लिए ठीक नहीं है। 

 

  •  आज से यह नियम बनाएं कि शयनकक्ष में या बिस्तर पर कोई भी स्क्रीन नहीं लाएंगे। 


सुबह सूर्य की रोशनी देखें 
जागने के बाद सूर्य के किरणों के संपर्क में आने के कई लाभ हैं। बड़ा फायदा यह है कि इससे नींद सुधारने वाला हार्मोन मेलाटोनिन का स्राव रुक जाता है। कोशिश करें कि हर सुबह 15 मिनट सूर्य की रोशनी में बिताएं। 

बिस्तर सिर्फ सोने के लिए हो
महामारीकाल में वर्क फ्रॉम होम के कारण लोगों ने बेड को भी कामकाज की जगह बना लिया है  दिनभर वहां कंप्यूटर, डायरी या किताबों का जमावड़ा रहने लगा है। इससे रात में उसी बिस्तर पर सोने पर वह मानसिक सुकून नहीं देता। 

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व्यायाम बेहद जरूरी 
29 अध्ययनों में पता लगा है कि नियमित कसरत से लोगों को जल्दी सोने में मदद मिलती है और वे पूरी नींद भी ले पाते हैं।

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