दुनिया में कोरोना की चुनिंदा वैक्सीन से ही उम्मीदें हैं। अभी कोई ऐसी वैक्सीन नहीं है जो 100 फीसदी असरदार दिखी हो। अब तक के परीक्षण के अनुसार फाइजर 95, ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका 62 से 92 जबकि मॉडर्ना की वैक्सीन 95 फीसदी असरदार दिखी है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई भी वैक्सीन 100 फीसदी असरदार नहीं हो सकती। ये दावा जरूर है कि दूसरे रोगों की वैक्सीन की तुलना में ये वैक्सीन बराबर असरदार होंगी।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के माइक्रोबियल पैथोजन विशेषज्ञ डॉ. एंड्रयू प्रेस्टॉन के अनुसार, वैक्सीन 70 या 90 फीसदी असरदार है तो वायरस के खिलाफ वो बेहतर काम कर सकती है। इसका मतलब है कि दस में से नौ लोगों जिसको टीका लगेगा वह कोरोना के संपर्क में आएगा वो बीमार नहीं होगा।
वैक्सीन व्यक्ति को संक्रमित होने से नहीं बचा सकती है लेकिन टीका लगने के बाद संक्रमण की चपेट में आने पर उसके अंदर कोई लक्षण नहीं आएगा। इसके साथ ही बीमारी का प्रसार भी नहीं होगा। जितने अधिक लोगों को टीका लगेगा महामारी दायरा खत्म होगा और वायरस लुप्त होने लगेगा।
सौ फीसदी असरदार वैक्सीन तैयार करना नामुमकिन
यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम के वायरोलॉजिस्ट प्रो. विल इर्विंग बताते हैं कि 100 फीसदी असरदार वैक्सीन तैयार करना लक्ष्य होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया का हर व्यक्ति एक दूसरे से कई तरह से अलग होता है।
वैक्सीन वायरस के खिलाफ अपना काम मेमोरी बनाकर तैयार करती है। अगर दोबारा इस तरह का वायरस शरीर की इम्युनिटी के संपर्क में आता है तो मेमोरी दोबारा सक्रिय हो जाएगी जिससे वायरस हावी नहीं हो पाएगा।