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सार्स से 93 फीसदी तक मिलता है कोरोना, वायरस को समझने में आगे बढ़े वैज्ञानिक

Wed, 08 Apr 2020 07:15 PM IST
अमित कुमार पीटीआई, न्यूयॉर्क
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कोरोना वायरस- सांकेतिक - फोटो : social media
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कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने में लगे वैज्ञानिकों को एक कामयाबी हासिल हुई है। उन्होंने उस लक्ष्य के पहचान कर ली है, जिसके जरिए कोविड-19 का इलाज किया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने उस पूरे तंत्र का आकलन किया, जिसके जरिए कोरोना वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है।

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वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया कि आखिर यह वायरस इंसानी शरीर में किस तरह प्रवेश करता है। उन्होंने यह भी देखा कि इसी तरह के अन्य वायरस की प्रक्रिया किस तरह की होती है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस सार्स-कोव-2 और 2002-03 में आई महामारी के लिए जिम्मेदार और सार्स वायरस के मिश्रण वाले छोटे प्रोटीनों की भी तुलना की।  

पत्रिका ‘एंटी-वायरल’ रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 के लिए जिम्मेदार विषाणु और सार्स वायरस में 93 प्रतिशत समानता है। अध्ययन में अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ता भी शामिल रहे।
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अनुसंधानकर्ताओं को उम्मीद है कि भविष्य के अध्ययनों में यह समझा जा सकेगा कि वायरस मानव शरीर में किस तरह प्रवेश करता है, कौन सा रासायनिक संकेत प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाता है। यह वायरस किस तरह श्वसन क्षेत्र में इतनी आसानी से अपनी प्रतिकृति तैयार कर लेता है।

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