धरती को बचाने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। मिस्र के इस तटीय शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (कॉप27) में शामिल होने के लिए जुटे विश्व के नेताओं ने मंगलवार को साफ कहा कि बातें बहुत हो चुकीं, अब कड़ी कार्रवाई का वक्त है। ग्रीन हाउस गैसों (कार्बन) के लिए जिम्मेदार बड़ी तेल और गैस कंपनियों पर टैक्स लगाने की मांग भी तेज हुई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सोमवार को सम्मेलन में चेतावनी देते हुए कहा था कि जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया नरक के हाईवे और पैर एक्सेलरेटर पर है। बचे रहने के लिए दुनिया के सामने सहयोग के अलावा कोई विकल्प नहीं है। गरीब देशों के नेताओं की तरफ से कड़ी कार्रवाई की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई है। इनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के जिम्मेदार नहीं होते हुए भी उन्हें ही सबसे ज्यादा इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बड़ी तेल कंपनियां लाभ का कुछ हिस्सा साझा करें
ब्राउन एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टोन ब्राउन ने भी छोटे द्वीपीय देशों की तरफ से बड़ी तेल व गैस कंपनियों पर कार्बन टैक्स लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये कंपनियां रोजाना तीन अरब डॉलर का मुनाफा कमा रही हैं। अब समय आ गया है कि ये कंपनियां नुकसान और क्षति के वित्त पोषण के लिए अपने लाभ का कुछ हिस्सा दें। सेनेगल के राष्ट्रपति मैकी साल ने कहा कि हम ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के पक्ष में हैं, लेकिन अपने हितों की अनदेखी की कीमत पर नहीं।
तापमान को नियंत्रित रखने में भारत कर सकता है मदद : यादव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से लड़ने के लिए मैंग्रोव सबसे अच्छा विकल्प है। भारत को मैंग्रोव को उगाने और उनको बनाए रखने में महारत हासिल है। वह अपनी इस विशेषज्ञता को दूसरे देशों के साथ साझा कर तापमान को नियंत्रित रखने में उनकी मदद कर सकता है। मैंग्रोव समुद्र के तटीय इलाकों और दलदली जमीन पर उगने वाले पेड़-पौधों और वनस्पतियों को कहते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कॉप27 से इतर ‘मैंग्रोव अलायंस फॉर क्लाइमेट’ के शुभारंभ के मौके पर यह बात कही। संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया ने दुनियाभर में मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और बहाली को मजबूत करने के उद्देश्य से यह गठबंधन बनाया है। इसमें भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन और श्रीलंका भी शामिल हुए।
जो अपराध नहीं किया, उसकी कीमत क्यों चुकाएं : अफ्रीकी देश
अफ्रीकी देशों ने कहा कि उन्होंने जो अपराध नहीं किया है, उसके लिए कीमत क्यों चुकाना चाहिए। मध्य अफ्रीका गणराज्य के राष्ट्रपति फॉस्टिन अर्चेंज टौडेरा ने जलवायु परिवर्तन के लिए अमीर देशों को जिम्मेदार ठहराया। केन्या के राष्ट्रपति विलियम के. रूटो ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से हमारे लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य को सीधे खतरा है। सेशल्स के राष्ट्रपति वेवल जॉन चार्ल्स रामकलावन ने भी कहा कि दूसरे द्वीपों की तरह पृथ्वी के विनाश के लिए हम बहुत कम जिम्मेदार हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान हमें ही उठाना पड़ रहा है।
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने काफी प्रगति की है, उसके लक्ष्य महत्वाकांक्षी : फ्रांस
जलवायु परिवर्तन को रोकने और पर्यावरण संरक्षण में भारत के योगदान को सराहते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां ने कहा कि अक्षय ऊर्जा को लेकर भारत ने काफी प्रगति की है। इसे लेकर भारत के लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी हैं। मैक्रां ने उल्लेख किया कि भारत सहित फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और इंडोनेशिया गैर-अक्षय ऊर्जा से दूर जाने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं।
भारत-फ्रांस की पहल पर 106 देशों ने किए हस्ताक्षर
भारत और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय सौर समझौते (आईएसए) के फ्रेमवर्क पर अब तक 106 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है। आईएसए के जरिए सभी देश साझे प्रयासों पर बल देंगे।