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क्रिटिकल रेस थ्योरी पर तकरार: नस्लवाद का इतिहास पढ़ाने पर अमेरिकी राज्यों में क्यों लग रही रोक?

Mon, 12 Jul 2021 05:36 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका में अब नया बवाल पैदा हो गया है। इसकी वजह है क्रिटिकल रेस थ्योरी। इसमें नस्लवाद का इतिहास पढ़ाया जाता है और इसके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।
 
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नस्लभेद - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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अमेरिका में अब क्रिटिकल रेस थ्योरी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गई है। इस सिद्धांत के तहत अकादमिक दायरे में नस्लवाद के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले राज्य एरिजोना में बीते हफ्ते इस सिद्धांत को विश्वविद्यालयों में पढ़ाने पर रोक लगा दी गई। इसके पहले आठ और रिपब्लिकन शासित राज्यों में ऐसी रोक लगाई जा चुकी है। रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक कंजरवेटिव जन समूहों में इस सिद्धांत को लेकर पहले से विरोध भाव रहा है। इस सिद्धांत के तहत अमेरिका में नस्लवाद के तहत संस्थागत अन्याय का इतिहास पढ़ाया जाता है। कंजरवेटिव खेमों के मुताबिक ये विषय समाज को बांटने का काम कर रहा है।

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विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन राज्यों के हालिया फैसलों का असर यह हो सकता है कि टेक्स्ट बुक तैयार करने वाली समितियां ऐसे हर विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने से बचने लगें, जो राज्य सरकारों को पसंद नहीं है। 

थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन में अमेरिकन एजुकेटर पैनल की सह-निदेशक और वरिष्ठ पॉलिसी रिसर्चर जुलिया कॉफमैन ने टीवी चैनल एनबीसी से कहा-'अगर मैं किसी ऐसे राज्य में रहती जहां ऐसा कानून पारित हुआ है, तो मैं ऐसे कानून से संबंधित तमाम विषयों के लेकर सतर्क हो जाती। मुझे लगता कि इस झेमेले में ना पड़ना ही बेहतर है।'
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कॉफमैन ने कहा कि ऐसे मामलों में कोर्स तय करने वाले लोग जरूरत से भी ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, तो मुमकिन है कि वे न सिर्फ नस्लवाद, बल्कि लिंग भेद और दूसरे सामाजिक अध्ययनों को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने से बचने लगें। कुछ दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में पहले से ही ऐसी बहुत सी बातें नहीं पढ़ाई जातीं, जिन्हें छात्रों को जानना चाहिए। मसलन, जिन राज्यों में कंजरवेटिव सोच का वर्चस्व है, वहां अश्वेत लोगों के ऐतिहासिक अनुभवों को आम तौर पर पाठ्यक्रम में नहीं रखा गया है।

साल 2015 में टेक्सस राज्य में ये सामने आया कि वहां की पाठ्य पुस्तकों में अफ्रीका से लाए गए गुलामों की चर्चा आव्रजक या मजदूर बता कर गई गई थी। पिछले साल अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच से पता चला था कि अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में एक ही विषय को अलग-अलग नाम और संदर्भों के साथ पढ़ाया जाता है। जो कैलिफोर्निया राज्य में पढ़ाया जाता है, उसका संदर्भ टेक्सस या फ्लोरिडा राज्यों में पढ़ाए जाने वाले संदर्भ से बिल्कुल अलग होता है। गौरतलब है कि अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में पाठ्यक्रम समीक्षा समितियों का गठन राजनीतिक आधार पर होता है। 

यूनिवर्सिटी ऑप सदर्न कैलिफोर्निया में एसोसिएट प्रोफेसर मॉर्गन पोलिकॉफ ने एनबीसी से कहा कि कंजरवेटिव राज्यों में पहले से ही छात्र तथ्यों को हटा कर ‘स्वच्छ’ किया गया इतिहास पढ़ते हैँ। अब जो कदम उठाए जा रहे हैं उससे उन छात्रों में नस्लीय मुद्दे या अन्य ऐतिहासिक समस्याओं पर जागरूकता लाना और मुश्किल हो जाएगा।

जॉर्ज फ्लॉयड हत्याकांड के बाद बढ़ी जिज्ञासा
अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी शिक्षक यूनियन अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स के मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम- शेयर माई लेसन- के मुताबिक 2020 में ब्लैक नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की एक पुलिसकर्मी के हाथों हत्या के बाद से अमेरिका में ब्लैक समुदाय की गुलामी के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ी है। नेशनल काउंसिल फॉर सोशल स्टडीज की अध्यक्ष स्टेफेनी वेजर ने एनबीसी से कहा- 'शिक्षक पढ़ाने के लिए सिर्फ टेक्स्ट बुक पर निर्भर नहीं रहते। वे पूरक सामग्रियों का भी इस्तेमाल करते हैं, अब प्रतिबंध लगने का नतीजा यह होगा कि ऐसी सामग्रियों की निगरानी बढ़ जाएगी।'

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