उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने वियतनाम दौरे के तीसरे दिन प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक और नेशनल एसेंबली की अध्यक्ष गुयेन थी किम नगन के साथ चर्चा पर आपसी संबंधों को और मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर बात की।
नायडू रविवार को तामचुक पगोड़ा में 16वें संयुक्त राष्ट्र वैशाख दिवस को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर से बुद्ध के अनुयायी वियतनाम पहुंचे हुए हैं।
इससे पहले उप राष्ट्रपति ने वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह और महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। नायडू ने मानवता के लिए भारत पहल के तहत भारतीय दूतावास में जयपुर फुट कृत्रिम अंग फिटमैन शिविर का उद्घाटन कर इसके वियतनामी लाभार्थियों से मुलाकात की।
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर शुरू किए गए इस मिशन की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि जयपुर फुट ने हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी है और उन्हें सम्मान से जीने का अवसर उपलब्ध कराया है। उप राष्ट्रपति ने वैशाख दिवस में आए प्रतिनिधियों के सम्मान में दिए गए रात्रि भोज में भी हिस्सा लिया।
उप राष्ट्रपति ने तीसरे दिन की शुरुआत विश्वप्रसिद्ध हान कीम झील के किनारे पैदल घूमकर की। इस भ्रमण के अनुभव को फेसबुक पर बताते हुए उन्होंने लिखा कि यहां के लोगों की शारीरिक गतिविधियों में संलिप्तता अद्भुत थी। लोगों के समूह लयबद्ध धुनों पर अभ्यास कर रहे थे।
ऐसा लग रहा था मानो वे आनंदमय सुबह के हर पल का आनंद ले रहे हों। इसने मुझे भारतीय कहावत-शरीरम् आद्यम, खलु धर्म साधनम् को सच्चे अर्थों में समझा दिया। अपने कर्तव्यों के भलीभांति निर्वहन के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा कि बाहरी गतिविधियों के लिए खुले स्थान, अवसर और सुविधाएं बढ़ाना बड़ा लोकहितकारी कदम हो सकता है।
देर शाम विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने बताया कि उप राष्ट्रपति के वियतनाम दौरे से दोनों देशों के रिश्ते और प्रगाढ़ हुए हैं। यह दौरा दोनों के बीच लगातार चल रहे उच्चस्तरीय संवादों की ही कड़ी था। दोनों ही देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी दोनों अच्छे सहयोगी साबित होंगे। इस मौके पर वियतनाम में भारत के राजूदूत पी हरीश भी मौजूद थे।
संयुक्त राष्ट्र वैशाख दिवस
यह बौद्ध् धर्म के अनुयायियों का सबसे बड़ा उत्सव है। कई स्थानों पर इसे वेसक या वेसाख भी उच्चारित किया जाता है। उल्लेखनीय है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म और निर्वाण हुआ था। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 16 साल से हर वर्ष अलग-अलग देशों में इसका आयोजन किया जाता है। इस बार यह आयोजन वियतनाम के तामचुक पगौड़ा में हो रहा है। पगोड़ा शब्द का प्रयोग किसी संत के अवशेषों पर निर्मित स्तंभाकार मंदिरों के लिए किया जाता है।