अफ्रीकी देश कांगो में विद्रोही समूहों के साथ चल रहे संघर्ष के बीच सेना को बड़ी सफलता मिली है। कांगो सेना ने पूर्वी कांगो के उत्तरी किवु और दक्षिणी किवु के कई शहरों को विद्रोहियों के कब्जे से मुक्त कराया है।
बताया जाता है कि पूर्वी कांगो में बीते कई दशकों से 100 से ज्यादा विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष चल रहा है। रवांडा सीमा के पास खनिज समृद्ध क्षेत्र पर अधिकार करने के लिए विद्रोही समूह आपस में लड़ रहे हैं। अपना दायरा बढ़ाने की होड़ में विद्रोही समूह कांगो के शहरों पर कब्जा कर रहे हैं। इसके चलते अब तक सात मिलियन से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। जबकि एक लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से भाग गए हैं।
कांगो की सेना ने कहा कि सेना ने लुम्बिशी, रुजिरांतका, कामतले, बिटागाटा, काबिंगो को विद्रोही समूहों के कब्जे से मुक्त कराया। इन शहरों पर विद्रोहियों ने कई महीनों से कब्जा कर रखा था। इसमें उत्तरी किवु प्रांतीय राजधानी गोमा के पास मासीसी क्षेत्र का एक प्रमुख शहर नगुंगू भी शामिल है।
उत्तरी किवु में सेना के प्रवक्ता गुइलाउम एनडजिक काइको ने कहा कि विद्रोहियों को कांगो के सुरक्षा बल एफएआरडीसी ने अपने साहसिक कार्यों से रोक दिया। उन्होंने कहा कि सभी जगह उन्हें पीछे धकेल दिया गया है। उन्होंने इस जीत का श्रेय दोनों प्रांतों के कमांडरों के नेतृत्व में चलाए गए संयुक्त सैन्य अभियान को दिया।
सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं लोग
सेना ने कहा कि मुक्त कराए शहरों के लोगों ने घर वापसी का जश्न मनाया। साथ ही वह सुरक्षा को लेकर चिंतित भी नजर आए। स्थानीय निवासी नसबीमाना एलेक्सिस ने कहा कि हम नगुंगू में हैं, लेकिन हम लगातार पीड़ित हैं क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है। यहां लोग मरते रहते हैं, हमने 30 मिनट पहले ही एक व्यक्ति को दफनाया है।
कई गांवों में नहीं पहुंच पा रही सहायता, शिविरों पर आश्रित हैं लोग
कांगो सेना और विद्रोहियों के बीच लगातार होने वाली झड़पों ने दर्जनों गांवों को सहायता की पहुंच से बाहर कर दिया है। लोग यहां पर शिविरों पर आश्रित हैं। फ्रांसीसी चैरिटी संस्था डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ) ने कहा है कि मासी में विस्थापित शिविरों और सहायता सुविधाओं पर दबाव पड़ रहा है। क्योंकि अधिक संख्या में लोग हिंसा से बचने के लिए शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। मासीसी में एमएसएफ समन्वयक रोमेन ब्री ने कहा कि हम इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्षेत्र में मानवीय सहायताकर्मियों की भारी कमी के कारण हालात मुश्किल हो रहे हैं।
एम23 है प्रभावशाली विद्रोही समूह
इस क्षेत्र में एम23 सबसे प्रभावशाली विद्रोही समूह है। यह 10 साल पहले सामने आया था, जब उसके लड़ाकों ने कांगो के पूर्व में सबसे बड़े शहर गोमा पर कब्जा कर लिया था। समूह का नाम 23 मार्च, 2009 को हुए एक शांति समझौते की वजह से एम23 रखा गया। समझौते में विद्रोहियों को कांगो की सेना में शामिल करने की वकालत की गई थी। एम23 का आरोप है कि सरकार समझौते का पालन नहीं कर रही। उस पर लंबे समय से रवांडा के समर्थन के साथ काम करने का आरोप है। इसे रवांडा के हजारों सैनिकों का समर्थन हासिल है। हालांकि, रवांडा ने एम23 को समर्थन देने के आरोपों का खंडन करता रहा है।