कांगो और रवांडा समर्थित विद्रोही गुटों ने शनिवार को एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मकसद पूर्वी कांगो में दशकों से जारी संघर्ष को समाप्त करना है। इसमें स्थायी युद्धविराम और एक व्यापक शांति समझौते के लिए प्रतिबद्धता जताई गई है। समझौते पर एक महीने के भीतर अंतिम रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
अंतिम शांति समझौते पर 18 अगस्त को हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिका की मध्यस्थता से कांगो और रवांडा की सरकारों के बीच जून में समझौता हुआ था। इस समझौते में दोनों देशों ने मिलकर शांति स्थापित करने की बात मानी थी। उसी समय एम 23 के विद्रोहियों ने पूर्वी कांगो के दो बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया था।
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एम23 नाम के इस विद्रोही समूह को रवांडा का समर्थन हासिल है और यह पूर्वी कांगो में सक्रिय 100 से अधिक सशस्त्र समूहों में सबसे प्रमुख है। यह क्षेत्र खनिज संसाधनों से भरपूर है और यहां का संघर्ष वर्षों से जारी है। इस संघर्ष के कारण करीब 70 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे 'दुनिया के सबसे लंबे, जटिल और गंभीर मानवीय संकटों में से एक' कहा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम शांति समझौते की शर्तें क्या होंगी और दोनों पक्ष क्या रियायतें देंगे। एम 23 विद्रोही समूह अपने उन सदस्यों की रिहाई की मांग कर रहा है, जिन्हें कांगो की सेना ने पकड़ा हुआ है और जिनमें से कई को मृत्युदंड का सामना करना पड़ रहे हैं। वहीं, कांगो सरकार चाहती है कि विद्रोही अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटें।
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संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, एक मुख्य मुद्दा यह भी है कि क्या रवांडा विद्रोहियों को अपना समर्थन बंद करेगा, जिसमें वे हजारों सैनिक भी शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी पूर्वी कांगो में है।
जून में रवांडा और कांगो सरकार के बीच हुआ था समझौता
जब जून में अमेरिका में रवांडा और कांगो सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, तब रवांडा के विदेश मंत्री ओलिवियर नदुहुंगिरेहे ने कहा था कि रवांडा अपनी 'रक्षात्मक कार्रवाइयां' रोकने पर सहमत है। उनका इशारा पूर्वी कांगो में तैनात रवांडा की सेना की ओर था। बशर्ते कांगो उस सशस्त्र समूह को निष्क्रिय कर दे, जिस पर रवांडा ने 1994 के नरसंहार को अंजाम देने वालों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
आसान नहीं होगा एम 23 को कुछ शहरों पीछे हटना
विश्लेषकों का कहना है कि एम 23 के विद्रोहियों के लिए पूर्वी कांगो के गोमा और बुकावू जैसे शहरों से पीछे हटना आसान नहीं होगा। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि कांगो सरकार उन्हें कितनी छूट देती है।