राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदीन ने कहा कि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने करने जा रहे हैं। क्योंकि उन पर हिंसा से निपटने को लेकर दबाब बढ़ रहा है। आंतरिक झगड़ों से विचलित होने की जरूरत नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने युद्ध नहीं, बल्कि लड़ाई हारी है।
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के पूर्वोत्तर हिस्से में बढ़ रही हिंसा से निपटने के लिए राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदीन ने नई रणनीति बनाई है। उन्होंने कहा कि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने जा रहे हैं। क्योंकि उन पर हिंसा से निपटने को लेकर दबाब बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने सत्तारूढ़ गठबंधन सेक्रेड यूनियन ऑफ द नेशन की बैठक में कहा कि आंतरिक झगड़ों से विचलित होने की जरूरत नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने युद्ध नहीं, बल्कि लड़ाई हारी है। मुझे विपक्ष सहित सभी से संपर्क करना चाहिए। अब राष्ट्रीय गठबंधन की सरकार बनाने की जरूरत है।
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लगातार बढ़ रहे एम 23 विद्रोही
बीते महीने रवांडा समर्थित विद्रोही संगठन एम23 और अन्य उग्रवादी संगठनों ने पूर्वी कांगो के गोमा शहर पर कब्जा किया था। उस लड़ाई में करीब 3000 लोग मारे गए थे। इसी हफ्ते विद्रोहियों ने पूर्वी कांगो के बुकावु शहर पर भी कब्जा कर लिया था। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सोने और कोल्टन के भंडार हैं। साथ ही मोबाइल फोन, लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले कैपिसेटर्स को बनाने में जिन खनिजों का इस्तेमाल होता है, उनके भी भंडार पूर्वी कांगो में मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, विद्रोहियों को रवांडा से लगभग 4,000 सैनिकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि कांगो की सेना को क्षेत्रीय शांति सैनिकों, संयुक्त राष्ट्र बलों, सहयोगी मिलिशिया और बुरुंडी के सैनिकों का समर्थन मिल रहा है।
क्या है लड़ाई की वजह
100 से ज्यादा विद्रोही संगठन मिलकर कांगो पर हमला कर रहे हैं। इनमें एक प्रमुख संगठन है एम23। इस संगठन में करीब चार हजार लड़ाके रवांडा के हैं। रवांडा का आरोप है कि साल 1994 में रवांडा के अल्पसंख्यकों तुत्सीस और उदारवादी हुतुस जनजाति के लोगों का नरसंहार किया गया और इस नरसंहार के पीछे कट्टरपंथी हुतु लोग शामिल थे। रवाडां का कहना है कि अब उन्हीं कट्टरपंथी हुतु जनजाति के लोगों को कांगो की सेना में भर्ती किया जा रहा है। रवांडा का कहना है कि वे तुत्सीस और उदारवादी हुतु लोगों की सुरक्षा के लिए कांगो में बदलाव लाना चाहता है और उसे एक असफल राष्ट्र से आधुनिक राष्ट्र बनाना चाहता है। हालांकि विश्लेषकों को रवांडा के इस दावे पर शक है और उनका कहना है कि रवांडा की नजरें कांगो के खरबों डॉलर की कीमत वाली खनिज संपदा पर है और रवांडा कांगो पर कब्जा कर उसकी खनिज संपदा का अपने फायदे के लिए दोहन करना चाहता है।