चिंता: कभी जंग के लिए दांव पर लगा दी थी जान, अब इस्राइली हमलों के नतीजों को देखकर अफसोस जता रहे पूर्व जनरल
Wed, 02 Sep 2026 06:21 AM IST
निर्मल कांत
अजम अहमद/नटान ओडेंहाइमर रोनेन बर्गमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, तेल अवीव।
सार
एक पूर्व जनरल ने युद्ध में अपनी भूमिका और फैसलों को लेकर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि कभी जिस जंग के लिए जान तक दांव पर लगाई थी, उसके नतीजे अब चिंता बढ़ा रहे हैं। इस्राइली हमलों के बाद सामने आए हालात को देखकर उन्होंने अपने पुराने फैसलों पर सवाल उठाए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूर्व जनरल को अपनी भूमिका पर अफसोस होने लगा? पढ़िए रिपोर्ट
कभी गाजा, लेबनान और ईरान के खिलाफ युद्धों में इस्राइली सेना का नेतृत्व करने वाले पूर्व जनरल और खुफिया अधिकारी अब अपने ही देश की नीतियों से खफा नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि यहूदी आतंकवाद एक बड़ा खतरा बन चुका है। इस्राइल के सामने सबसे बड़ा खतरा बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों और चरमपंथियों से है, जिन्हें सरकारी शह मिल रही है।
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सेवानिवृत्त मेजर जनरल इयाल बेन-रौवेन समेत कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने हाल ही में इस्राइली कब्जे वाले वेस्ट बैंक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लूटे और ध्वस्त कर दिए गए फलस्तीनी स्कूलों को देखा। साथ ही, उन इलाकों का भी जायजा लिया, जहां यहूदी बस्तियों के लोगों की ओर से फलस्तीनियों को प्रताड़ित करके उनकी जमीनें छीन ली गई हैं। जनरल बेन-रौवेन ने भावुक होकर कहा कि यहूदी बस्तियों के लोगों की ऐसे हरकतें ईरान, गाजा या लेबनान से भी बड़ा और वास्तविक खतरा हैं।
इस दौरे का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त जनरल याकूब (79) ने इसे स्पष्ट तौर पर जातीय सफाया करार दिया। एयरफोर्स के पूर्व जनरल असाफ एगमोन ने इसकी तुलना यहूदियों के ऐतिहासिक नरसंहार से करते हुए कहा, भले ही इसका पैमाना अलग हो, लेकिन वेस्ट बैंक से फलस्तीनी अस्तित्व को मिटाने का यह प्रयास उसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब कोई समाज इस तरह के कृत्यों पर उतर आता है, तो उसका पतन तय है।
वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रहा तनाव
अक्तूबर 2023 के हमास हमलों के बाद से वेस्ट बैंक में हिंसा और तनाव लगातार बढ़ा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि बस्तियों के हमलों के कारण हजारों फलस्तीनी विस्थापित हुए हैं। इसी वर्ष जून में 200 से अधिक प्रतिष्ठित इस्राइली हस्तियों-जिनमें दो पूर्व पीएम, दर्जनों सेवानिवृत्त जनरल, खुफिया प्रमुख और नोबेल विजेता शामिल हैं-ने एक पत्र जारी कर सरकार से इस यहूदी आतंकवाद पर तत्काल नकेल कसने की मांग की थी।
सेना, चरमपंथियों की मिलीभगत
पत्र में नेतन्याहू सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि प्रशासन केवल लापरवाही नहीं बरत रहा, बल्कि एक सुनियोजित सरकारी नीति के तहत सेना और पुलिस जैसे सुरक्षा तंत्रों को इसमें शामिल कर रहा है। वेस्ट बैंक में हो रही हिंसा अनियंत्रित, विवेकहीन और मासूम नागरिकों को निशाना बनाने वाली है, जिसका एकमात्र उद्देश्य फलस्तीनी राज्य की हर संभावना को खत्म करना है।